Lok Sabha Elections: कांग्रेस ने तिरुवनंतपुरम सीट से शशि थरूर पर फिर लगाया दांव, लड़ाई हुई रोचक, केंद्रीय मंत्री से होगा सामना
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव को देखते हुए अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में 39 नामों का एलान हुआ, जिसमें राहुल गांधी, भूपेश बघेल और शशि थरूर जैसे दिग्गज नेता शामिल थे। कांग्रेस ने तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से शशि थरूर पर फिर से दांव लगाया है।
By Anurag Mishra
Publish Date: Fri, 08 Mar 2024 09:55 PM (IST)
Up to date Date: Fri, 08 Mar 2024 09:55 PM (IST)

डिजिटल डेस्क, इंदौर। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव को देखते हुए अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में 39 नामों का एलान हुआ, जिसमें राहुल गांधी, भूपेश बघेल और शशि थरूर जैसे दिग्गज नेता शामिल थे। कांग्रेस ने तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से शशि थरूर पर फिर से दांव लगाया है। यह लड़ाई अब और भी रोचक हो गई है, क्यों कि उनका सामना इस बार केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर से होगा। भाजपा की पहली लिस्ट में तिरुवनंतपुरम से उनका नाम भी शामिल था।
भाजपा की पिछले सप्ताह ही 195 उम्मीदवारों की पहली सूची सामने आई थी। इस सूची में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई दिग्गजों के नाम थे। इन नामों में केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर का भी नाम शामिल था। उनको भाजपा ने तिरुवनंतपुरम से उतारा है। राजीव चंद्रशेखर ने मीडिया से लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। उनकी इसी इच्छा का मान रखते हुए पार्टी ने उन्हें तिरुवनंतपुरम जैसी हाईप्रोफाइल सीट दी है। राजीव चंद्रशेखर तीन बार से राज्यसभा के लिए चुने जाते रहे हैं। उनका 2 अप्रैल को कार्यकाल खत्म हो रहा है।
तिरुवनंतपुरम का रोचक है इतिहास
2009 में शशि थरूर तिरुवनंतपुरम सीट से पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। यहां से पहले कभी माकपा, तो कभी कांग्रेस जीतती रही है, लेकिन जब से शशि थरूर ने यहां पर खूंटा गाड़ा, तब से कोई उसे उखाड़ नहीं पाया। उन्होंने यहां से 2009, 2014 व 2019 में लगातार चुनाव जीतकर जीत की हैट्रिक लगाई है। अब राजीव चंद्रशेखर के यहां से प्रत्याशी बनने से जाने यह लड़ाई और भी दिलचस्प हो गई है।
दक्षिण में सेंधमारी की कोशिश
भाजपा दक्षिणी राज्यों में अपनी पैठ को मजबूत करना चाहती है, इसलिए वह वहां पर लगातार प्रयास भी कर रही है। 2019 में भाजपा ने दक्षिण की 129 सीटों में से महज 29 सीटें हीं जीती थीं। भाजपा को ज्यादातर सीटें तेलंगाना और कर्नाटक में ही हासिल हुई थीं।



















