Priya Rajvansh demise anniversary, know fascinating info about her life, homicide, chetan anand | प्रिया राजवंश की मौत की गुत्थी कभी नहीं सुलझी: 22 साल में की सिर्फ 7 फिल्में, देव आनंद के भाई के बेटों पर लगा इनके कत्ल का आरोप

12 मिनट पहले

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बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रिया राजवंश की आज 23वीं डेथ एनिवर्सरी है। उन्हें बॉलीवुड की क्लासिक फिल्मों में से एक ‘हीर रांझा’ से पहचान मिली थी। इस फिल्म में उन्होंने हीर का किरदार निभाया था। इनकी जिंदगी किसी परी कथा से कम नहीं थी। एक तस्वीर की बदौलत वो फिल्मों में आ गईं।

पहली ही फिल्म में काम करते हुए डायरेक्टर चेतन आनंद से प्यार हो गया लेकिन इनका अंत बेहद दर्दनाक हुआ।

सिर्फ सात फिल्मों में नजर आईं प्रिया 27 मार्च 2000 को अपने घर में मृत पाई गईं, उनकी मौत पर खूब विवाद हुए, गिरफ्तारियां भी हुईं लेकिन हत्या किसने की आज तक साबित नहीं हो पाया।

उनकी डेथ एनिवर्सरी पर जानते हैं उनकी लाइफ से जुड़े कुछ दिलचस्प फैक्ट्स और किस्सों पर..

प्रिया की पहली फिल्म 'हकीकत' हिट साबित हुई थी।

प्रिया की पहली फिल्म ‘हकीकत’ हिट साबित हुई थी।

शिमला में जन्मीं, लंदन में पढ़ीं प्रिया

30 दिसंबर 1936 को सरकारी अधिकारी सुंदर सिंह के घर एक बेटी का जन्म हुआ जिसका नाम वीरा सुंदर सिंह रखा गया। वीरा की स्कूलिंग और ग्रेजुएशन तक कि पढ़ाई शिमला में ही हुई। फिर किसी प्रोजेक्ट के सिलसिले में सुंदर सिंह का ट्रांसफर लंदन हो गया और वीरा भी परिवार के साथ लंदन पहुंच गईं। यहां वीरा ने लंदन के रॉयल एकेडमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट्स में एडमिशन ले लिया।

उनके खानदान में किसी का फिल्मों से नाता नहीं था लेकिन वीरा को एक्टिंग में दिलचस्पी थी इसलिए उन्होंने रॉयल एकेडमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट्स में एडमिशन ले लिया। वीरा एक्टिंग सीखने लगीं और इसी दौरान उन्हें मॉडलिंग के भी ऑफर मिलने लगे।

तस्वीर ने बदली जिंदगी, फिल्मों में मिला काम

एक दिन लंदन के एक फोटोग्राफर की नजर पर वीरा की खूबसूरती पर पड़ी और उसने उनकी कुछ तस्वीरें चुपके से क्लिक कर लीं। एक प्रोग्राम के दौरान लंदन से ये फोटोग्राफर भारत आया जहां उसने सबसे पहले फिल्ममेकर ठाकुर रणवीर सिंह को ये तस्वीर दिखाई।

रणवीर ने तस्वीर देखी और तो वो प्रिया की खूबसरती निहारते ही रह गए। फिल्म इंडस्ट्री में जिसने भी वीरा की तस्वीरें देखी वो उनका दीवाना हो उठा। सब ये जानने को बेताब हो उठे कि आखिर ये लड़की कौन है?

वीरा की उस तस्वीर को देव आनंद के भाई चेतन आनंद ने भी देखा जो कि उस जमाने के जाने-माने डायरेक्टर थे। 1963 में जब चेतन भारत-चीन वॉर पर फिल्म ‘हकीकत’ बनाने की प्लानिंग की तो उन्होंने वीरा को फिल्म में कास्ट करने का मन बना लिया। उन्होंने वीरा से मिलने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया और आखिर में एक डायरेक्टर की बदौलत उनकी मुलाकात वीरा से हो गई।

चेतन ने वीरा को हकीकत में काम करने का ऑफर दिया जिसे उन्होंने स्वीकार लिया। फिल्म की शूटिंग से पहले चेतन ने वीरा को नाम बदलने की सलाह दी और उनका नाम प्रिया रख दिया। ‘हकीकत’ रिलीज हुई और हिट रही। प्रिया राजवंश चमक गईं और फिल्ममेकर्स उन्हें फिल्म में कास्ट करने को बेताब हो उठे।

फिल्म 'हकीकत' की शूटिंग के दौरान चेतन आनंद और प्रिया राजवंश।

फिल्म ‘हकीकत’ की शूटिंग के दौरान चेतन आनंद और प्रिया राजवंश।

15 साल बड़े चेतन आनंद से हुआ प्यार

उधर शूटिंग के दौरान चेतन प्रिया को पसंद करने लगे। वो प्रिया की खूबसूरती पर फिदा हो गए। हकीकत की शूटिंग के दौरान से ही उनका नाम प्रिया से जुड़ने लगा और बॉलीवुड के गॉसिप गलियारों में दोनों के अफेयर के चर्चे आम हो गए। ये बात ज्यादा तेजी से इसलिए भी फैली क्योंकि चेतन पहले से शादीशुदा थे। वो प्रिया से 15 साल बड़े थे।

चेतन अपनी शादीशुदा जिंदगी से खुश नहीं थे और पत्नी से अनबन के चलते उनसे अलग रह रहे थे। निजी जिंदगी की परेशानियों के बीच प्रिया के साथ वक्त गुजारकर उन्हें सुकून मिलने लगा। उधर प्रिया भी उन्हें पसंद करने लगीं।

प्रिया ने चेतन के भाई देव आनंद के साथ 1977 की फिल्म साहेब बहादुर की।

प्रिया ने चेतन के भाई देव आनंद के साथ 1977 की फिल्म साहेब बहादुर की।

चेतन आनंद ने फिल्में बनानी छोड़ीं, प्रिया का करियर हुआ ठप्प

निजी जिंदगी की करीबी का असर रील लाइफ पर भी हुआ। चेतन प्रिया को लेकर इतने पजेसिव थे कि वो उन्हें किसी और फिल्ममेकर के साथ काम नहीं करने देते थे। यही वजह है कि हकीकत के बाद उन्होंने जितनी भी फिल्में बनाईं, उनमें सिर्फ प्रिया को ही बतौर हीरोइन साइन किया।

‘हकीकत’ के बाद प्रिया की दूसरी फिल्म हीर रांझा थी जिसमें हीर के रोल में उन्हें बेहद पसंद किया गया। प्रिया ने अपने करियर में कुल सात फिल्में की थीं। 1964 में शुरू हुआ उनका फिल्मी सफर फिल्म हाथों की लकीरों पर खत्म हुआ और यही उनकी आखिरी फिल्म भी साबित हुई।

इसकी वजह ये थी कि चेतन आनंद ने हाथों की लकीरों के बाद फिल्में बनाना बंद कर दिया था। उन्होंने फिल्में छोड़ने के बाद दूरदर्शन के लिए केवल एक सीरियल बनाया जिसका नाम परमवीर चक्र था। चेतन आनंद ने फिल्में बनाना छोड़ा तो प्रिया का करियर भी खत्म हो गया क्योंकि वो किसी और फिल्ममेकर के साथ काम नहीं करती थीं।

फिल्म 'हीर रांझा' में प्रिया राजकुमार के अपोजिट नजर आई थीं।

फिल्म ‘हीर रांझा’ में प्रिया राजकुमार के अपोजिट नजर आई थीं।

लिव इन में रहीं लेकिन नहीं की शादी

प्रिया अपने जमाने की सबसे पढ़ी-लिखी एक्ट्रेस थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने परिवार का दबाव होने के बावजूद शादीशुदा चेतन को न छोड़ा न ही कभी शादी की। दोनों लिव-इन में चेतन आनंद के जुहू के रुइया पार्क बंगले पर साथ रहते थे।

चेतन के दो बेटों को ये बात बिलकुल पसंद नहीं थी कि उनके पिता उनकी मां से अलग होकर प्रिया के साथ एक बंगले में अलग रहते हैं। दोनों ही बेटों विवेक और केतन को प्रिया फूटी आंख नहीं सुहाती थीं। मामला और गरमा गया जब चेतन आनंद ने अपनी वसीयत बनवाई। उसमें उन्होंने जितनी जायदाद केतन और विवेक के नाम की, उतनी ही प्रिया के भी नाम कर दी। साथ ही जुहू वाला बंगला भी उन्होंने प्रिया के नाम कर दिया. दोनों ने इसका भरपूर विरोध किया लेकिन चेतन ने उनकी एक न सुनी।

चेतन का हुआ निधन, अकेली रह गईं प्रिया

प्रिया का चेतन से रिश्ता उनकी मौत तक कायम रहा। 6 जुलाई 1997 को चेतन आनंद दुनिया से चल बसे। इसके बाद प्रिया बेहद अकेली हो गईं। उनके पास सुख-दुख बांटने वाला कोई नहीं बचा। तकरीबन तीन साल उन्होंने बेहद तन्हाई में काटे। वो चेतन के साथ जिस बंगले में 20 साल तक रहीं, उसी में अकेले रहना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया। वो कभी कभार ही बंगले से बाहर निकलती थीं।

इन सात फिल्मों में प्रिया ने किया काम

इन सात फिल्मों में प्रिया ने किया काम
1964 हकीकत
1970 हीर रांझा
1973 हिंदुस्तान की कसम
1973 हंसते जख्म
1977 साहेब बहादुर
1981 कुदरत
1986 हाथों की लकीरें

अनसुलझी पहेली बन गई प्रिया की मौत

फिर आया 27 मार्च 2000…ये वो दिन था जब प्रिया की लाश उन्हीं के बंगले से मिलने की वजह से सनसनी फैल गई। पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में खुलासा हुआ कि प्रिया की कोई नैचुरल डेथ नहीं हुई बल्कि उनका मर्डर हुआ था। मर्डर का शक चेतन के दोनों बेटों केतन और विवेक पर किया गया और इनके साथ बंगले के दो नौकरों माला और अशोक को भी हत्या में शामिल होने के आरोपों के साथ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

दरअसल, चेतन के बेटों से खराब संबंधों का जिक्र प्रिया ने अपनी डायरी में भी किया था और उन्होंने अपनी जान को खतरे का भी अंदेशा जताया था। उन्होंने डायरी में ये भी लिखा था कि चेतन की मौत के बाद उनके बेटे उन पर बंगला छोड़ने और वसीयत में चेतन द्वारा उनके नाम की गई जायदाद को लौटाने का दबाव बना रहे हैं।

इसी को आधार बनाकर पुलिस ने केतन और विवेक समेत दोनों नौकरों को गिरफ्तार कर लिया। इन्हें सजा भी सुनाई गई लेकिन नवंबर 2002 में इन्हें जमानत मिल गई। 2011 में कोर्ट ने सबूत न होने की वजह से चारों को मामले से बरी कर दिया और इस तरह प्रिया की मौत हमेशा के लिए एक अनसुलझी पहेली बनकर रह गई।

Bhopal Information: पूर्व नेवी अधिकारी के साथ 68.49 लाख की ठगी, दुबई से निकला कनेक्शन

साइबर क्राइम पुलिस के मुताबिक फरवरी 2024 को पूर्व नेवी अधिकारी की ओर से ठगी की शिकायत की गई थी। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर साइबर क्राइम पुलिस की टीम को जांच में लगाया था।

By Paras Pandey

Publish Date: Tue, 26 Mar 2024 09:44 PM (IST)

Up to date Date: Tue, 26 Mar 2024 09:47 PM (IST)

Bhopal News: पूर्व नेवी अधिकारी के साथ 68.49 लाख की ठगी, दुबई से निकला कनेक्शन
साइबर ठगी का पुलिस ने करीब सवा महीने बाद राजफाश कर दिया है।

HighLights

  1. पुलिस ने राजस्थान से किसान राजेंद्र मीणा और बैंक कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया
  2. जयपुर, केरल के खातों में जमा होकर रुपये दुबई तक पहुंचे
  3. राजस्थान व केरल के चार आरोपितों को किया गया गिरफ्तार

भोपाल, (नईदुनिया प्रतिनिधि)। राजधानी के पूर्व नेवी अधिकारी के साथ साइबर ठगी का पुलिस ने करीब सवा महीने बाद राजफाश कर दिया है। उनके साथ 68.49 लाख रुपये की ठगी का दुबई कनेक्शन निकला है। ठगी के रुपये जयपुर, केरल के बैंक खातों से होते हुए दुबई तक पहुंचे।

इस मामले में पुलिस ने राजस्थान और केरल के चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक बैंक कर्मचारी भी शामिल है। इन शातिर ठगों ने पीड़ित को 200 एमडीएमए जैसे अति उत्तेजक मादक पदार्थ का पार्सल एयरपोर्ट पर पकड़ने और मनी लांड्रिंग मामले में फंसाने की बात कहकर डराया और रकम ऐंठ ली। दुबई में बैठे इस ठगी के मास्टरमाइंड ने मुंबई का डीसीपी बनकर पीड़ित से बात की और किराये पर लिए बैंक खातों में रकम जमा करवाई थी।

साइबर क्राइम पुलिस के मुताबिक फरवरी 2024 को पूर्व नेवी अधिकारी की ओर से ठगी की शिकायत की गई थी। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर साइबर क्राइम पुलिस की टीम को जांच में लगाया था। इसमें सामने आया कि राजस्थान के ग्राम सांचोली, तहसील बामनवास थाना बाटोदा जिला सवाई माधोपुर राजस्थान निवासी 26 वर्षीय राजेंद्र मीणा के एक निजी बैंक के खाते में ठगी की कुछ राशि जमा हुई है।

जब पुलिस राजेंद्र मीणा तक पहुंची तो पता चला कि आरोपित ने नमो नारायण नाम के व्यक्ति को अपना खाता करीब डेढ़ लाख रुपये में बेच दिया था।

जब पुलिस ने उस खाते की और जानकारी निकाली तो पता चला कि निजी बैंक के कर्मचारी रंजीत नगर थाना खातीपुरा जयपुर राजस्थान निवासी 24 वर्षीय लोकेश सैनी ने उक्त बैंक खाता को गलत तरीके से खोलने में मदद की थी। इस पर पुलिस ने राजस्थान से किसान राजेंद्र मीणा और बैंक कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया। नमोनारायण की अभी कोई जानकारी नहीं मिली है।

मास्टर माइंड फिलहाल फरार है

उधर, इस ठगी की कुछ रकम आयशा मंजिल नैमरमूला मुत्ताथोडी गांव, जिला कासरगोड केरल निवासी 42 वर्षीय अब्दुल कादर एएन के खाते में जमा होना पाया गया।

जब पुलिस उस तक पहुंची तो पता चला कि उसका रिश्तेदार ग्राम पेरुम्बला थाना मेलपराम्बा कासरगोड केरल निवासी 39 वर्षीय अब्दुल रहमान उससे बैंक में जमा राशि को नकद निकालकर खुद लेता था और उसके बदले में कमीशन देता था। जब पुलिस ने अब्दुल रहमान से पूछताछ की तो उसने दुबई में रहने वाले कासरगोड केरल निवासी शाफी का नाम बताया।

वही साइबर ठगी का मास्टरमाइंड है, जो इस प्रकार की ठगी की रकम को केरल के इन लोगों के खातों में जमा करवाता है। पुलिस ने इस आधार पर अब्दुल कादर एएन और अब्दुल रहमान को केरल से गिरफ्तार कर लिया है। अब्दुल कादर सेल्समैन का काम करता है, जबकि रहमान खाड़ी देशों में काम करता है।