Dhar Information: तेजी से घट रहा नर्मदा नदी का जलस्तर, मई-जून माह में आ सकती है समस्या
नर्मदा का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है। जिसके चलते कोटेश्वर तीर्थ के चार घाट खुल गए हैं।
By Hemant Kumar Upadhyay
Publish Date: Mon, 25 Mar 2024 02:01 PM (IST)
Up to date Date: Mon, 25 Mar 2024 02:01 PM (IST)

HighLights
- फरवरी-मार्च में पांच मीटर कम हुआ जलस्तर
- उरी-बाघनी में भी कम हुआ बैक वाटर
- नर्मदा नदी के तीनों ऊपरी बांध में भी पानी भरा हुआ है
Dhar Information नईदुनिया न्यूज, सुसारी। सरदार सरोवर बांध में गत एक माह में पांच मीटर जल कम हुआ है। नर्मदा का जलस्तर तेजी से कम होने से कोटेश्वर तीर्थ के चार घाट अब खुल गए हैं। नर्मदा की दोनों सहायक नदी उरी और बाघनी में से भी अब तेजी से बैक वाटर कम होने लगा है। साल 2017 में बांध के गेट लगने के बाद पहली बार फरवरी और मार्च माह में पांच मीटर जलस्तर कम हुआ है।
शनिवार को सरदार सरोवर बांध का जलस्तर 124 मीटर पर था। जबकि कोटेश्वर तीर्थ पर नर्मदा का जलस्तर 123.50 मीटर पर था। इसके पूर्व एक माह पहले 23 फरवरी को नर्मदा का जलस्तर 128.50 मीटर पर था। एक माह में नर्मदा का जलस्तर तेजी से पांच मीटर कम हुआ है। हालांकि अभी भी नर्मदा में काफी पानी है और मध्यप्रदेश की नर्मदा नदी के तीनों ऊपरी बांध में भी पानी भरा हुआ है।
कोटेश्वर तीर्थ के चार घाट खुले
नर्मदा किनारे कोटेश्वर तीर्थ पर बने प्राचीन अहिल्या घाट के आठ में से चार घाट अब पूरी तरह खुल गए हैं। वहीं मुक्तिधाम और घाट निर्माण समिति द्वारा बनाए नए घाट के भी दो घाट पूरी तरह खुल गए हैं। इसके चलते अब स्नान करने के लिए आ रहे नर्मदा भक्तों को काफी आसानी हो रही है।
इस तरह जलस्तर घटा तो मई-जून माह में आ सकती है समस्या
सरदार सरोवर बांध में 23 फरवरी से 23 मार्च के मध्य एक माह में पांच मीटर जलस्तर कम हुआ है, जो गत पांच वर्ष में फरवरी और मार्च माह के मध्य में पहली बार इस तेजी से जलस्तर कम हुआ है। आगामी समय में इसी तरह आगे जलस्तर कम होता है तो मई और जून माह में क्षेत्र में नर्मदा का जलस्तर 114 मीटर के आसपास होने की संभावना है। इस स्तर पर जल पहुंचने से नर्मदा किनारे संचालित होने वाले पेयजल योजनाओं के सम्पवेल से नर्मदा का पानी दूर हो जाता है।
किसानों की सिंचाई के लिए मशक्कत शुरू
कुक्षी तहसील में 40 किमी में नर्मदा किनारे से सैकड़ों किसान विद्युत पंप के माध्यम से 10 से 20 किमी तक की पाइप लाइन बिछाकर अपने खेतों में नर्मदा का पानी सिंचाई के लिए ले जाते हैं। अब जैसे-जैसे नर्मदा का जलस्तर कम होता जाता है, वैसे-वैसे किसानों को अपने विद्युत पंप के साथ पाइप लाइन आगे करनी होती है, लेकिन सबसे अधिक दिक्कत विद्युत व्यवस्था को लेकर आती है, क्योंकि डूब से बाहर विद्युत लाइन 139 मीटर पर लगी हुई है। ऐसे में किसानों को पानी कम होने पर विद्युत लाइन को भी नर्मदा किनारे ले जाना होता है।
गुजरात में तेजी से पानी का उपयोग
सरदार सरोवर बांध से तेजी से जलस्तर कम होने का सबसे बड़ा कारण है बांध से गुजरात में तेजी से नहरों में पानी निकासी होना, लेकिन अब रबी सीजन में सिंचाई के लिए अंतिम दौर की नहरों में पानी निकासी कम हो जाएगी। ऐसे में आगामी समय में बांध में अभी जिस स्तर से जल कम हुआ है, वह आगे इतनी तेजी से न हो। हालांकि सरदार सरोवर बांध से 111 मीटर तक के लेवल तक भी बांध का पानी उपयोग में लिया जा सकता है।


