हाई कोर्ट ने जनहित याचिका किया खारिज, जब्त करें अमानत राशि

डिवीजन बेंच की कड़ी टिप्पणी, याचिकाकर्ता खुद पार्षद हैं, ऐसा नहीं हो सकता कि वे नगर पंचायत की कार्रवाई से अनजान हो

By Yogeshwar Sharma

Publish Date: Solar, 24 Mar 2024 11:07 PM (IST)

Up to date Date: Solar, 24 Mar 2024 11:07 PM (IST)

हाई कोर्ट ने जनहित याचिका किया खारिज, जब्त करें अमानत राशि

बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। नगर पंचायत गौरेला की पार्षद और उनके पति द्वारा दायर जनहित याचिका को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कड़ी टिप्पणी के साथ खारिज कर दिया है। साथ ही अमानत राशि को जब्त करने के निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कड़ी टिप्पणी भी की है। कोर्ट ने कहा कि हम संतुष्ट नहीं है कि यह एक वास्तविक याचिका है जो जनहित के रूप में दायर किया गया है।

गौरेला नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक आठ की पार्षद ममता जायसवाल और उनके पति प्रदीप जायसवाल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अलग-अलग जनहित याचिका दायर की थी। इसमें प्रेसिडेंट इन कौंसिल के निर्णय के विपरीत नगर पंचायत के अफसरों द्वारा कार्य करने का आरोप लगाया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल के डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने कहा है कि याचिकाकर्ता ममता जायसवाल वार्ड नंबर आठ का पार्षद है और याचिकाकर्ता नंबर दो प्रदीप जायसवाल याचिकाकर्ता नंबर एक ममता के पति है और वे नगर पंचायत द्वारा शुरू की गई कार्रवाई से अनजान नहीं हैं। याचिकाकर्ताओं ने सीएमओ नगर पंचायत की कार्रवाई के खिलाफ पहले ही एसडीएम गौरेला से शिकायत की है। प्रकरण एसडीएम के कोर्ट में विचाराधीन है। याचिकाकर्ताओं ने दायर जनहित याचिका में कहा है कि राधा कृष्ण मंदिर के सामने स्थित जमीन राजस्व अभिलेखों में लंबे समय से आयुर्वेदिक औषधालय के नाम से दर्ज है। वहां एक आयुर्वेदिक अस्पताल बना हुआ था और विधिवत काम कर रहा था। चूंकि आयुर्वेदिक औषधालय की इमारत जर्जर और क्षतिग्रस्त हो गई थी। नगर पंचायत, गौरेला के अध्यक्ष-इन-काउंसिल (पीआइसी) ने 13 अगस्त 2022 को एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें कहा गया है कि आयुर्वेदिक औषधालय के स्थान पर आमतौर पर जनता का हित है। भूतल पर एक शापिंग काम्प्लेक्स का निर्माण किया जाएगा और पहली मंजिल पर एक नए आयुर्वेदिक औषधालय का निर्माण किया जाएगा। अधिकारियों ने खसरा नंबर 466/4 और 478/2 के भूतल पर एक शापिंग काम्प्लेक्स का निर्माण किया है और आयुर्वेदिक औषधालय का नाम दर्ज किया है। बिना पीआइसी द्वारा कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है। नगर पंचायत गौरेला और राज्य सरकार या किसी भी नगर पंचायत के अधिकारी द्वारा कोई मंजूरी या आदेश पारित किए बिना, उन्होंने पहली मंजिल पर भी शापिंग काम्प्लेक्स का निर्माण शुरू कर दिया और अधिकारियों ने काम पूरा हुए बिना ही भूतल की दुकानों की नीलामी कर दी। इसे लेकर याचिकाकर्ताओं ने नगर पंचायत के अफसरों के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत किया है। उन्हें पहली मंजिल पर शापिंग काम्प्लेक्स के निर्माण को रोकने और पहली मंजिल पर आयुर्वेदिक औषधालय का निर्माण करने के लिए कहा गया है।

नगर पंचायत सीएमओ को एसडीम ने जारी किया नोटिस

याचिकाकर्ता ममता जायसवाल की शिकायत पर एसडीएम पेंड्रारोड ने संज्ञान में लेते हुए सीएमओ नगर पंचायत गौरेला को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। खसरा नंबर 466/4 और 478/2 आयुर्वेदिक के नाम पर दर्ज और आवंटित किया गया था। औषधालय और उन्हें शापिंग काम्प्लेक्स के निर्माण से पहले मंजूरी और आदेश सहित निर्माण के संबंध में सभी प्रासंगिक दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद भी नगर पंचायत के अधिकारियों ने निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगाई। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि नगर पंचायत के अधिकारियों का कृत्य कानून के सिद्धांतों के विपरीत है।

नगर पंचायत ने दिया जवाब

खसरा नंबर 476/1 की भूमि नगर पंचायत के कब्जे में है। गौरेला परिषद की 13 अगस्त 2010 की बैठक में प्रस्ताव संख्या 25 के तहत पुराने और जीर्ण-शीर्ण औषधालय भवन को ध्वस्त करने का निर्णय लिया गया और बेसमेंट में शापिंग काम्प्लेक्स और उसके बाद पहली मंजिल पर आयुर्वेदिक औषधालय का निर्माण करने का निर्णय लिया गया। उपरोक्त भूमि रकबा 9688 वर्ग फुट है। इसमें 0.817 हेक्टेयर पर नगर का कब्जा है। नगर पंचायत गौरेला द्वारा इसका प्रस्ताव राजस्व विभाग को भेजा गया और राजस्व विभाग ने आठ जून 2020 को कलेक्टर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को निर्देशित किया। सात जुलाई .2021 को कलेक्टर ने उक्त भूमि को नगर पंचायत गौरेला के नाम आवंटित कर दिया। जिला आयुर्वेद औषधालय, बिलासपुर ने अपने पत्र 26 नवंबर 2014 द्वारा सूचित किया था कि 13वें वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुसार उन्होंने नगर पंचायत के माध्यम से ज्योतिपुर प्राथमिक विद्यालय के सामने औषधालय के निर्माण और उसके बाद एक नए स्थान पर निर्माण करने का निर्णय लिया है।