MP Lok Sabha Election 2024: मध्य प्रदेश की सियासत पर नारों का गहरा असर, फिलहाल भाजपा में भी सन्नाटा
MP Lok Sabha Election 2024: कांग्रेस के हाथ अभी तक खाली, पार्टी का फोकस प्रत्याशी घोषित करने पर।
By Dhananajay Pratap Singh
Publish Date: Solar, 24 Mar 2024 03:30 AM (IST)
Up to date Date: Solar, 24 Mar 2024 03:30 AM (IST)

HighLights
- सियासत पर नारों के प्रभाव में सबसे प्रभावशाली माना जाता है।
- 2013 के विधानसभा में भाजपा की तरफ से अबकी बार, शिवराज सरकार का नारा दिया गया।
- 2018 के चुनाव आने तक कांग्रेस भी नारों की ताकत का एहसास कर चुकी थी।
MP Lok Sabha Election 2024: धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। सत्ता परिवर्तन का माद्दा रखने वाले चुनावी नारे मध्य प्रदेश की सियासत की अलग ही पहचान बनाते हैं। कई नारों ने तो देशभर को आकर्षित भी किया है, लेकिन लोकसभा चुनाव में अब तक ऐसा कोई नारा सामने नहीं आया है, जिससे चुनाव का माहौल गरमा सके। भाजपा के लिए केंद्रीय नेतृत्व का नारा ‘अब की बार 400 पार’ के साथ ‘एक बार फिर मोदी सरकार’ ही है, जबकि कांग्रेस के हाथ अभी खाली हैं।
सियासत पर नारों के प्रभाव में सबसे प्रभावशाली माना जाता है भाजपा द्वारा दिग्विजय सिंह के लिए गढ़ा गया ‘मिस्टर बंटाधार’ का टैग, जिसने साल 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया। यह आज भी कितना प्रभावशाली है, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि मध्य प्रदेश में कोई भी चुनाव हो भाजपा इसे पुरजोर तरीके से उछालती है। इसके बाद चार बार तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान ने अपने लिए मामा का टैग इस कदर मजबूत कर लिया कि उन्हें पूरे भारत में बहनों के भाई और बच्चों के मामा के रूप में जाना जाता है।
2013 के विधानसभा में भाजपा की तरफ से ‘अबकी बार, शिवराज सरकार’ का नारा दिया गया, जो कांग्रेस की सत्ता वापसी की उम्मीद पर भारी पड़ा और एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस की कमान संभाली। 2018 के चुनाव आने तक कांग्रेस भी नारों की ताकत का एहसास कर चुकी थी।
ऐसे में कमल नाथ के नेतृत्व में कांग्रेस ने 2018 के चुनाव में नारा दिया ‘वक्त है वदलाव का’ तो दूसरी ओर भाजपा की तरफ से ‘समृद्ध मध्य प्रदेश’ और ‘अबकी बार 200 पार’ का नारा दिया गया, लेकिन बदलाव का नारा सफल हुआ, जिससे कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की। इस चुनाव में कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को युवा चेहरे के रूप में जब सामने किया तो भाजपा ने अपना युवा वोट बैंक बचाने के लिए नारा दिया था ‘माफ करो महाराज हमारा नेता तो शिवराज’।
दिलचस्प बात है कि बाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थकों के साथ भाजपा में आ गए और भाजपा ने इस नारे को हमेशा के लिए भुला दिया। बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ‘एमपी के मन में मोदी, मोदी के मन में एमपी’ का नारा देकर बड़ी जीत हासिल की। हालांकि कमलनाथ ने कांग्रेस सरकार की वापसी की उम्मीद में ‘कांग्रेस आएगी, खुशहाली लाएगी’ का नारा दिया, लेकिन वह सफल नहीं हो सका, कांग्रेस की सीटें भी काफी कम हो गईं।
लोकसभा चुनाव में फिलहाल मध्य प्रदेश से कोई नारा सामने नहीं आ सका है। भाजपा जो नारे गढ़ने में आगे रही है, वह भी केंद्रीय नेतृत्व के अबकी बार 400 पार, एक बार फिर मोदी सरकार को ही लेकर आगे बढ़ रही है।


