Raibareilly Lok Sabha Chunav 2024: रायबरेली सीट जीतने के लिए भाजपा का फॉर्मूला तैयार, इस बड़े चेहरे पर खेल सकती है दांव

Raibareilly Lok Sabha Chunav 2024: कांग्रेस का गढ़ रही रायबरेली सीट को जीतने के लिए भाजपा वरूण गांधी काे उम्‍मीदवार बनाने की तैयारी में है।

By Bharat Mandhanya

Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 03:48 PM (IST)

Up to date Date: Fri, 22 Mar 2024 03:48 PM (IST)

Raibareilly Lok Sabha Chunav 2024: रायबरेली सीट जीतने के लिए भाजपा का फॉर्मूला तैयार, इस बड़े चेहरे पर खेल सकती है दांव
रायबरेली में वरूण गांधी और प्रियंका गांधी के बीच चुनावी जंग हो सकती है

Raibareilly Lok Sabha Chunav 2024 डिजिटल डेस्‍क, रायबरेली। गांधी परिवार की परंपरागत सीट रही रायबरेली संसदीय सीट भाजपा के लिए हर चुनाव में चुनौती रही है। यहां पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके पति फिरोज गांधी चुनाव लड़कर संसद पहुंच चुके हैं। तो वहीं सोनिया गांधी 2004 से लगातार इस सीट से जीतती रही हैं। 2014 और 2019 में मोदी लहर के बावजूद भाजपा कांग्रेस के इस किले को नहीं भेद सकी। अब चर्चा है भाजपा इस सीट पर गांधी नाम के सहारे माहौल को अपने पक्ष में करने की तैयारी में है।

दरअसल, इस सीट पर गांधी परिवार बड़ा नाम रहा है। ऐसे में भाजपा यहां से वरुण गांधी को चुनाव लड़वाकर कांग्रेस का किला भेदने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस यहां से प्रियंका गांधी को चुनाव लड़वा सकती है, पार्टी के कई पदाधिकारी इसके पक्ष में हैं। ऐसे में वरुण गांधी को चुनावी मैदान में उतारकर यह मुकाबला गांधी बनाम गांधी बना सकती है।

मेनका गांधी को पीलीभीत से लड़ाने की चर्चा

इधर, मेनका गांधी को सुल्तानपुर के बजाए पीलीभीत से चुना लड़ाने की चर्चा है, उन्‍हें यह संदेश भी दे दिया गया है। लिहाजा मेनका गांधी के पास अब पीलीभीत का ही विकप्‍ल बचा है। इस सीट पर पिछले दो चुनावों में भाजपा को जीत मिली है। सुल्‍तानपुर में 2014 में वरुण गांधी और 2019 में मेनका गांधी ने जीत दर्ज की थी। वहीं अब पार्टी मेनका गांधी को पीलीभीत भेजकर सुल्तानपुर से स्थानीय चेहरे को मौका देने की तैयारी कर रही है। जिसमें पार्टी जिला अध्‍यक्ष सहित कई अन्‍य नाम चल रहे हैं।

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    भरत मानधन्‍या ने इंदौर स्थित चोइथराम कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में BAJMC में स्नातक की पढ़ाई की है और स्‍कूल ऑफ इकोनॉमिक्‍स (देवी अहिल्‍या विश्‍वविद्यालय) से MA Economics की उपाधि प्राप्‍त की है।

    पत्रकारिता क …

Have been buddies with Randeep Hooda for 29 years | 29 सालों से रणदीप हुड्डा से है दोस्ती: ‘स्वतंत्र वीर सावरकर’ में अमित सियाल बने रणदीप के छोटे भाई, कहा- ऑस्ट्रेलिया के होटल में मिलकर बर्तन धोते थे

2 घंटे पहलेलेखक: किरण जैन

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एक्टर अमित सियाल जल्द ही फिल्म ‘स्वतंत्र वीर सावरकर’ में नजर आएंगे। फिल्म में उन्होंने विनायक दामोदर सावरकर (रणदीप हुड्डा द्वारा अभिनीत) के छोटे भाई, नारायण दामोदर का किरदार निभाया है।

हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान, अमित ने इस फिल्म से जुड़ी कुछ बातें शेयर कीं। वैसे, बता दें अमित और रणदीप की दोस्ती तकरीबन 29 सालों से है। इस बातचीत में उन्होंने रणदीप के साथ अपनी इस गहरी दोस्ती पर भी रोशनी डाली है। बातचीत के कुछ प्रमुख अंश:

स्वतंत्र वीर सावरकरके साथ जुड़ने का अनुभव कैसा रहा?

रौंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव था। फिल्म का हिस्सा बनने का, नारायण दामोदर सावरकर के किरदार में ढलने की जो प्रोसेस थी, वो अपने आप में किसी रिवोल्यूशन से कम नहीं थी। मेरे लिए ये किरदार किसी जिम्मेदारी से कम नहीं। हमने कोई भी मनगढ़ंत बातें नहीं कहीं। स्वतंत्रता सैनानियों ने बहुत कमाल की रियल चीजें की थीं। जिससे हमारा देश एक तरीके से शेप हुआ। वे महान लोग थे। वे रियल लोग थे।

उनसे यदि अच्छाई हुईं, तो कुछ गलतियां भी हो सकती हैं। लेकिन, वो गलती किसी के ओपिनियन में सही भी हो सकती हैं। हम सभी ने अपनी जिम्मेदारी को जितनी भी हद तक जा सकते थे, उस हद तक जाकर निभाई। आशा करता हूं कि जिन भी लोगों की स्वतंत्र वीर सावरकर के बारे में गलत ओपिनियन थी, वो बदलेगी।

रणदीप हुड्डा के साथ अपनी दोस्ती के बारे में कुछ बताएं

मेरी और रणदीप की दोस्ती तकरीबन 29 साल पुरानी है। दोस्त कम, हम भाई ज्यादा हैं। सालों पहले हम ऑस्ट्रेलिया में एक साथ थे। एक ही घर में रहते थे। वहां साथ में टैक्सियां चलाते थे। इतना ही नहीं, हमने वहां होटल में एक साथ बर्तन भी घिसे हैं। वेटर की जॉब करते थे।

मैं मेलबर्न में एक इंडियन होटल में बर्तन धोने का काम कर रहा था। होटल वालों ने खाने का इंतजाम किया था। वह खाना मैं अपने रूममेट्स के लिए भी ले जाता था। रणदीप मेरे रूममेट के दोस्त थे। एक जब घर आया तब रणदीप वहीं थे। जब मैंने उनसे बात की, तो मुझे एहसास हुआ कि हम दोनों की सोच एक जैसी है। हमारी बातचीत हमेशा एक्टिंग की ओर एक रास्ता तलाशती थी। उस दिन से अब तक तक, हमेशा एक दूसरे के संपर्क में रहे हैं।

रियल लाइफ में मैं उनसे केवल एक साल बड़ा हूं। लेकिन स्वाभाविक तौर पर वे मुझसे बड़े हैं। रणदीप बहुत ही मैच्योर व्यक्ति हैं। बतौर एक्टर भी उनका अनुभव मुझसे ज्यादा है। स्क्रीन पर हमारा ये पुराना बॉन्ड देखने को मिलेगा। स्क्रीन पर दोनों भाई की केमिस्ट्री दिखाने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी।

पिछले 29 सालों में रणदीप में क्या बदलाव आए?

रणदीप अपने टीनएज दौर में काफी नटखट थे। बहुत बदमाशी भी करते थे। दरअसल, उस वक्त उन्हें पता नहीं था कि उन्हें अपनी जिंदगी में करना क्या है। जब उन्होंने एक्टिंग की राह पकड़ी, तो धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिला। वक्त के साथ-साथ उनमें भी काफी बदलाव आए। अब वे काफी मैच्योर और फोकस्ड हैं। जो पहले नहीं थे।

एक्टिंग में आगे किस तरह के रोल एक्स्प्लोर करना चाहते हो?

मैंने अब तक कई इंटेंस रोल किए हैं। लेकिन अब मैं कॉमेडी करना चाहता हूं। मुझे लगता है कि मैं कॉमेडी बहुत अच्छी करता हूं। हाल ही में मैंने दो प्रोजेक्ट पूरे किए। जिनमें से एक ड्रामा कॉमेडी है, वहीं दूसरा आउट एंड आउट कॉमेडी है। बता दूं, ये स्लैपस्टिक कॉमेडी बिलकुल नहीं।

परेश रावल जी और मेरी एक फिल्म जल्द ही रिलीज होगी। साथ ही ‘रेड 2’ कर रहा हूं, जिसमें ऑडियंस मुझे कॉमेडी करते देखेगी। आगे चलकर कॉमेडी जॉनर को और भी ज्यादा एक्स्प्लोर करने की ख्वाहिश है।

एक्टिंग से पहले सिंगिंग में अपना करियर बनाना चाहते थे?

मुझे लिखने और गाने का बहुत शौक है। दरअसल, मैं एक्टिंग से पहले सिंगिंग में अपना करियर बनाना चाहता था। सालों पहले मैंने दिल्ली में एक कॉम्पटीशन में पार्टिसिपेट किया। वहां असली सिंगर्स की आवाज सुनी। मैंने वहीं सिंगर बनने के आइडिया को त्याग दिया। फिर एक्टिंग की राह पकड़ ली।

Badaun Double Homicide: जावेद ने बताया बदायूं में बच्चों की हत्या का कारण, हाथ में कलावा बांधता था हत्यारा साजिद

जावेद ने पूछताछ यह बताया कि साजिद को बचपन से दौरे पड़ते थे, जिसके कारण वह हिंसक हो जाता था।

By Ekta Sharma

Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 12:39 PM (IST)

Up to date Date: Fri, 22 Mar 2024 12:39 PM (IST)

Badaun Double Murder: जावेद ने बताया बदायूं में बच्चों की हत्या का कारण, हाथ में कलावा बांधता था हत्यारा साजिद
Budaun Double Homicide

HighLights

  1. साजिद दरगाह और मजारों के फेर में था।
  2. इस घटना में साजिद का भाई जावेद भी शामिल था।
  3. वह मानसिक रूप से परेशान था और दो बार आत्महत्या का प्रयास कर चुका था।

एजेंसी, बदायूं। Badaun Double Homicide: इस समय देशभर में बदायूं केस को लेकर सनसनी फैली हुई है। दो मासूम बच्चों का हत्यारा साजिद उन बच्चों से नफरत करता था। दरअसल, निकाह के चार साल बाद भी साजिद पिता नहीं बन पाया। इस कारण वह दूसरों के घर में भी बच्चों की खुशियां नहीं देख पा रहा था। मंगलवार को उसने बाजार मीट काटने वाला बड़ा छुरा खरीदा और उसके बाद आयुष और अहान नाम के दो मासूम बच्चों की गला रेतकर हत्या कर दी। इस घटना में साजिद का भाई जावेद भी शामिल था, जिसने सरेंडर कर दिया है। आज उसे कोर्ट में पेश किया गया।

पुलिस पूछताछ में बताया पूरा सच

जावेद अपने भाई साजिद की हिंसक प्रवृत्ति के बारे में जानता था। पुलिस के सामने साजिद ने सब सच बयां कर दिया है। उसने यह भी बताया कि साजिद दरगाह और मजारों के फेर में था। जावेद ने एनकाउंटर से बचने के लिए नाटकीय घटनाक्रम किया। सुबह चार बजे वह बरेली के सेटेलाइट बस स्टैंड पर पहुंचा। यहां पर उसने बिल्कुल मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला की तरह ही कहा कि मैं जावेद हूं बदायूं वाला, मुझे सरेंडर करना है इसलिए थाने ले चलो। वहीं, आयुष और अहान के पिता विनोद ने कहा कि यह झूठी कहानी है, यदि इंसाफ नहीं मिला, तो परिवार समेत आत्महत्या कर लेंगे।

मानसिक रूप से बीमार रहता था

जावेद ने पूछताछ यह बताया कि साजिद को बचपन से दौरे पड़ते थे, जिसके कारण वह हिंसक हो जाता था। वह 10 साल का था, जब परिवार ने काफी समय दरगाह पर भी रखा उसका ज्यादातर समय दरगाह, मजारों और पीरों के बीच बीतता था। वह मानसिक रूप से परेशान था और दो बार आत्महत्या का प्रयास कर चुका था। निकाह के चार साल बाद भी जब पिता नहीं बन सका, तो दूसरों के बच्चों से नफरत करने लगा। साजिद की पत्नी के तीन बच्चे गर्भ में और एक पैदा होते ही मर गया था। इसी पागलपन में उसने मंगलवार को मौका देखकर विनोद के घर में तीन बच्चों और दो महिलाओं को देखकर बाजार से छुरा खरीद लाया। उसने जावेद से कहा कि विनोद के घर कुछ काम है।

हाथ में कलावा बांधता था साजिद

साजिद, विनोद के घर गया और जावेद दरवाजे पर इंतजार कर रहा था। कुछ देर बाद साजिद खून से सना हुआ बाहर आया और हत्या के बारे में बताया। वहां से भागकर दोनों अलग हो गए। उसी रात साजिद एनकाउंटर में मारा गया, वहीं साजिद दिल्ली चला गया। बता दें कि साजिद और उसके परिवार की हेयर ड्रेसिंग की 10 दुकानें हैं। घटना वाले दिन दोपहर को सभी दुकानें बंद रखी गई थी। इस पर लोगों ने संदेह जताया कि हत्याकांड योजनाबद्ध था। इतना ही नहीं, साजिद कलावा बांधता था और भ्रमित करने के लिए दुकान में देवी-देवताओं के चित्र लगाता था। पूछताछ में तर्क दिया गया कि मंगलवार को बाल कटवाने वाले काफी कम लोग होते हैं, इसलिए दुकान बंद रखी गई।

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    एकता शर्मा नईदुनिया डिजिटल में सब एडिटर के पद पर हैं और बीते 2 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव है। साल 2022 से जागरण न्यू मीडिया (JNM) से जुड़ी हैं और Naiduni

Lok Sabha Election 2024: धार में पलायन बड़ी चुनौती, मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए आदिवासी रंग में रंगे अधिकारी

Lok Sabha Election 2024: धार में पलायन बड़ा मुद्दा रहा है। पलायन के चलते यहां मतदान कम ही होता है। ऐसे में अब अधिकारी भगोरिया के रंग में रंगकर मतदान की अपील कर रहे हैं।

By PremVijay Patil

Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 03:34 PM (IST)

Up to date Date: Fri, 22 Mar 2024 03:34 PM (IST)

Lok Sabha Election 2024: धार में पलायन बड़ी चुनौती, मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए आदिवासी रंग में रंगे अधिकारी
चुनाव के लिहाज से धार में पलायन बड़ी चुनौती है

HighLights

  1. आदिवासी रंग में रंगा प्रशासन
  2. लोगों से कर रहे मतदान की अपील
  3. पलायन के कारण कम होता है मतदान

Lok Sabha Election 2024 शुभम राठौड़, धार। धार जिले में लोकतंत्र के त्योहार के प्रति मतदाताओं में आस्था बड़ी है। परंतु जिले में मजदूर वर्ग का पलायन कहीं ना कहीं आज भी चिंता का विषय बना हुआ है। मजदूरों को मतदान वाले दिन समय पर अपने मूल गांव लाकर मतदान करवाना प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती रहा है। इस बार लोकसभा चुनाव में मजदूरों द्वारा शत प्रतिशत मतदान हो। इसको लेकर प्रशासन के आला अधिकारी भगोरिया की मस्ती में झूमते हुए नजर आ रहे है। आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगकर उनके साथ त्योहार मना रहे है और मतदान की अपील कर रहे हैं।

गुरूवार को जिले में कई जगह भगोरिया में स्वीप गतिविधियां की गई। इसमें गुजरी में नायब तहसीलदार कृष्णा पटेल व धामनोद थाना प्रभारी अमित सिंह द्वारा गले ढोल मांदल टांगकर आदिवासी समाजजनों मतदान के प्रति जागरूक किया। गौरतलब है कि यहां पलायन एक बड़ी समस्या बनी हुई है। आदिवासी लोग अपने रोजी-रोटी के लिए अपना घर परिवार छोड़कर गुजरात की ओर चले जाते हैं। ऐसे में यह लोग दीपावली, होली व अन्य पर्व पर अपने घरों की ओर लौटते हैं।

वहीं इन लोगों को मतदान केंद्रों तक लाने के लिए प्रशासन के तमाम अधिकारियों द्वारा तमाम प्रयास किए जाते हैं। यहां गांव में डोंडी पिटवाने के साथ ही मतदान के लिए मजदूरों से गुजरात में संपर्क कर उन्हें मतदान दिवस पर अपने मूल गांव लाया जाता है। इस काम के कर्मचारियों की ड्यूटी यहां लगाई जाती है। इसी का नतीजा है कि हर चुनाव में अब यहां मतदान का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है।

विधानसभा चुनाव में 77. 96 प्रतिशत मतदान

इस बार विधानसभा चुनाव के ठीक चार दिन पहले 13 दिसंबर को दीपावली का पर्व था। ऐसे में मजदूर वर्ग अपने गांव दीपावली पर्व मनाने आए थे। इसका फायदा इस बार प्रशासन को हुआ है। प्रशासन द्वारा दीपावली पर आए मजदूरों को मतदान के लिए रोका गया। जिसका नतीजा यह रहा कि जिले में 77. 96 प्रतिशत मतदान हुआ है। इसमें गंधवानी में 73.66 प्रतिशत, कुक्षी में 74. 78 तो मनावर में 77.23 प्रतिशत मतदान हुआ। बढ़ते हुए मतदान के प्रतिशत को देखते हुए अब प्रशासन की निगाहे भगोरिया पर है।

समझाइश देकर दिला रहे शपथ

इस बार मतदान को लेकर प्रशासन द्वारा आदिवासी समाजजन में पूरी तहर घुल मिल गए हैं। 13 को लोकसभा चुनाव के तहत मतदान होना है। बता दे इन दिनों जिले में भगोरिया हाट चल रहे है। ऐसे में आदिवासी समाजजन पलायन से अपने मूल गांव लौटे हुए है। वह पूरे दिन भगोरिया की मस्ती में अपने जीवन का आनंद ले रहे हे। ऐसे में भगोरिया में अधिकारी पहुंच कर पलायन करने वाले लोगों की जानकारी लेकर उनके बीच जाकर उनसे मतदान की अपील कर रहे है।

माना जा रहा है होली के बाद मजदूर वर्ग दोबारा पलायन के गुजरात व अन्य प्रदेश निकल जाएगा। ऐसे में उन्हें दोबारा अपने मूल गांव बुलवाना कहीं ना कही चुनौती भरा रहेगा। हालांकि भगोरिया में पलायन करने वाले लोगों से संपर्क कर उनके नंबर व रहने के स्थान की जानकारी मिलने से उन्हे मतदान वाले दिन आसानी से अपने मुल गांव बुलवाया जाएगा।

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    भरत मानधन्‍या ने इंदौर स्थित चोइथराम कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में BAJMC में स्नातक की पढ़ाई की है और स्‍कूल ऑफ इकोनॉमिक्‍स (देवी अहिल्‍या विश्‍वविद्यालय) से MA Economics की उपाधि प्राप्‍त की है।

    पत्रकारिता क …

Trupti Dimri seen with rumored boyfriend | तृप्ति डिमरी रूमर्ड बॉयफ्रेंड के साथ दिखीं: अरबाज-शूरा हाथों में हाथ डाले स्पॉट हुए; रकुल-जैकी, गौरी खान के रेस्टोरेंट जाते नजर आए

1 घंटे पहले

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‘एनिमल’ फिल्म से सुर्खियों में आईं तृप्ति डिमरी हाल ही में अपने बॉयफ्रेंड सैम मर्चेंट के साथ स्पॉट हुईं। तृप्ति कैजुअल लुक में बालों में तेल लगाए नजर आईं। बता दें, तृप्ति के रूमर्ड ब्वॉयफ्रेंड सैम गोवा के एक लग्जरी वीआईपी रिसॉर्ट ‘कासा वाटर्स’ के CEO हैं। वो एक समय में मॉडलिंग भी कर चुके हैं, साथ ही ट्रैवल ब्लॉगर भी हैं।

तृप्ति डिमरी अपने रूमर्ड बॉयफ्रेंड के साथ। तृप्ति जल्द ही 'भूल भुलैया-3' में नजर आएंगी।

तृप्ति डिमरी अपने रूमर्ड बॉयफ्रेंड के साथ। तृप्ति जल्द ही ‘भूल भुलैया-3’ में नजर आएंगी।

‘भूल भुलैया-3’ में नजर आएंगी एक्ट्रेस
वर्कफ्रंट पर तृप्ति की अगली फिल्म कार्तिक आर्यन स्टारर ‘भूल भुलैया-3’ है। मेकर्स ने हाल ही में इसकी अनाउंसमेंट की है। यह फिल्म इस साल दिवाली पर रिलीज होनी है। इसके अलावा तृप्ति विक्की कौशल के साथ ‘मेरे महबूब मेरे सनम’ और राजकुमार राव के साथ ‘विक्की विद्या का वो वाला वीडियो’ जैसी फिल्में भी कर रही हैं।

अरबाज-शूरा भी एक साथ दिखे
अरबाज खान वाइफ शूरा के साथ हाथों में हाथ डाले मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए। दोनों कैजुअल लुक में नजर आए। अरबाज खान ने 16 साल छोटी शूरा से 24 दिसंबर को शादी की।

रकुल-जैकी भी नजर आए
रकुल प्रीत और जैकी भगनानी ने पिछले महीने 21 फरवरी को गोवा में शादी की। कपल की शादी को 1 महीना पूरा हो गया। ऐसे में दोनों गौरी खान के रेस्टोरेंट ‘टोरी’ जाते स्पॉट हुए। जहां रकुल ग्रीन ड्रेस में ग्लैमरस दिखीं। वहीं जैकी कैजुअल लुक में नजर आए।

गौरी खान का पहला रेस्टोरेंट
गौरी खान एक फिल्म प्रोड्यूसर और शानदार इंटीरियर डिजाइनर हैं। उन्होंने साल 2002 में पति शाहरुख खान के साथ मिलकर रेड चिलीज एंटरटेनमेंट नाम का प्रोडक्शन हाउस शुरू किया था। इसके अलावा गौरी कई सेलिब्रिटीज के घर को भी डिजाइन कर चुकी हैं। इंटीरियर डिजाइनर के तौर पर गौरी खान ने मुकेश अंबानी, करण जौहर, आलिया भट्ट ​​और राल्फ लॉरेन जैसी हस्तियों के घर को डिजाइन किया है। इसी साल फरवरी में गौरी ने अपना पहला रेस्टोरेंट ‘टोरी’ भी खोल लिया है। जब से ये रेस्टोरेंट खुला है, तब से अक्सर यहां बी-टाउन सेलेब्स को स्पॉट किया जाने लगा है।

Delhi: केजरीवाल की गिरफ्तारी पर बोले अन्ना हजारे, ‘मुझे दुख हुआ, लेकिन यह कर्मों का फल’

अन्ना हजारे ने कहा, मुझे दुख है कि जिस आदमी ने मेरे साथ शराब के खिलाफ आवाज बुलंद की, वो आज खुद शराब नीति बना रहा है।

By Arvind Dubey

Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 08:25 AM (IST)

Up to date Date: Fri, 22 Mar 2024 12:55 PM (IST)

Delhi: केजरीवाल की गिरफ्तारी पर बोले अन्ना हजारे, 'मुझे दुख हुआ, लेकिन यह कर्मों का फल'
भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे के संघर्ष में अरविद केजरीवाल ने अहम भूमिका निभाई थी।

HighLights

  1. क्या केजरीवाल तिहाड़ जेल से चलाएं सरकार
  2. नंबर 2 मनीष सिसोदिया पहले ही जेल में
  3. आतिशी को मिल सकती है सीएम पद की जिम्मेदारी

एजेंसी, नई दिल्ली। शराब नीति कांड में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की देशभर में चर्चा है। कोई इसे सही ठहरा रहा है तो कोई राजनीाति से प्रेरित बता रहा है। इस बीच, समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी प्रतिक्रिया दी है।

समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, अन्ना हजारे ने कहा कि उन्हें केजरीवाल की गिरफ्तारी का दुख है। केजरीवाल ने सरकार के खिलाफ आंदोलन में उनके साथ काम किया था।

बकौल अन्ना हजारे, मुझे दुख है कि जिस आदमी ने मेरे साथ शराब के खिलाफ आवाज बुलंद की, वो आज खुद शराब नीति बना रहा है। सत्ता के कारण ऐसा हुआ है। यह कर्मों का फल है जो केजरीवाल को भोगना पड़ रहा है।

— ANI (@ANI) March 22, 2024

इस बीच, केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि उन्होंने इस्तीफा दिया तो दिल्ली का मुख्यमंत्री कौन बनेगा? हालांकि दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी मार्लेना ने साफ किया है कि केजरीवाल ही सीएम थे, सीएम हैं और सीएम बने रहेंगे?

इसका अर्थ यह भी निकाला जा रहा है कि जल्दी जमानत नहीं मिली, तो केजरीवाल अब जेल में रहकर सरकार चलाएंगे?

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(ED लॉकअप में गुजरी अरविंद केजरीवाल की रात, नहीं सो पाए, बेचैन रहे, जानिए आज क्या होगा..पूरी खबर पढ़ने के लिए फोटो पर क्लिक करें)

Who’s prone to be Delhi’s subsequent CM?

आम आदमी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि केजरीवाल तिहाड़ जेल से सरकार चलाते रहेंगे, लेकिन जानकारों का माना है कि इससे संवैधानिक संकट पैदा हो जाएगा। ऐसा करना संभव नहीं होगा।

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पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को दिल्ली के सीएम के बाद पार्टी में नंबर 2 माना जाता था, इसी मामले में फरवरी 2023 से तिहाड़ में हैं।

कालकाजी से विधायक आतिशी के पास अभी दिल्ली सरकार में सबसे अधिक विभाग हैं। इनमें सिसोदिया द्वारा खाली किए गए विभाग भी शामिल हैं। ऐसे में आतिशी के अगली मुख्यमंत्री बनने की संभावना है।

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    करियर की शुरुआत 2006 में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के हिंदी सांध्य दैनिक ‘प्रभात किरण’ से की। इसके बाद न्यूज टुडे और हिंदी डेली पत्रिका (राजस्थान पत्रिका समूह) में सेवाएं दीं। 2014 में naidunia.com से डिजिटल की

Lok Sabha Election 2024: छत्‍तीसगढ़ निर्माण के बाद से अब तक हुए लोकसभा चुनाव में अटलजी पर केंद्रित नारों ने किया प्रभावित

Lok Sabha Election 2024: छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद अब तक हुए लोकसभा चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री व भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी पर केंद्रित चुनावी नारों ने मतदाताओं को बेहद प्रभावित किया है।

By Ashish Kumar Gupta

Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 03:23 PM (IST)

Up to date Date: Fri, 22 Mar 2024 03:23 PM (IST)

Lok Sabha Election 2024: छत्‍तीसगढ़ निर्माण के बाद से अब तक हुए लोकसभा चुनाव में अटलजी पर केंद्रित नारों ने किया प्रभावित

राधाकिशन शर्मा/बिलासपुर। Lok Sabha Election 2024: छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद अब तक हुए लोकसभा चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री व भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी पर केंद्रित चुनावी नारों ने मतदाताओं को बेहद प्रभावित किया है। वर्ष 2004 से लेकर 2024 तक हुए लोकसभा चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी से संबंधित नारों की बहार रही है। यह लोगों को भाजपा के साथ कनेक्ट करने में मददगार साबित हुआ है। एक प्रभावी नारा, जो हर लोकसभा चुनाव में गूंजता है वह है, ‘नजर अटल पर, वोट कमल पर ‘।

यह 2004 के लोकसभा चुनाव में आया था। चुनावी नारे हो या स्लोगन, इसे कुछ इस अंदाज में मतदाताओं के सामने परोसा जाता है, जिसे पढ़कर लोग सोचने के लिए मजबूर हो जाते हैं। नारों को पढ़ने के बाद लोगों के मन में संबंधित नेता की छवि सीधे उतरने लगती है। उनके द्वारा किए गए काम हो या फिर किए गए वादे…। सब-कुछ आंखों के सामने चलचित्र की भांति दिखने लगते है।

यह छवि इतनी असरदार होती है कि संबंधित पार्टी के उम्मीदवार को वोट देने के लिए सोचने पर मजबूर कर देती है। या ऐसा भी कह सकते हैं कि प्रभावी नारों की वजह से मतदाता उम्मीदवार के पक्ष में वोट के रूप में अपना समर्थन दे देते हैं। राज्य गठन के बाद लोकसभा के पांच चुनाव हुए हैं।

इन सभी चुनावों में भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी को अपने केंद्र में रखा है। अटलजी से संबंधित नारों की लोकसभा चुनाव में गूंज होते रही है। राज्य निर्माता के रूप में हो या फिर छत्तीसगढ़ राज्य गठन के लिए उनके द्वारा किए गए ईमानदार वायदे। एक नारे के दम पर छत्तीसगढ़वासियों को सब-कुछ याद आ जाता है।

भाजपा के इन नारों ने लुभाया

नजर अटल पर, वोट कमल पर, 1996 में अब की बारी अटलबिहारी, 2023 के विधानसभा चुनाव में अब नहीं सहिबो बदल के रहिबो, हमने बनाया है हम ही संवारेंगे। 1999 के चुनाव में प्रचलित नारा था- अटल बिहारी जरूरी है, ताराचंद मजबूरी है।

1980 में गूंजा कांग्रेस का यह नारा

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को केंद्र में रखकर वर्ष 1980 में बिलासपुर के कवि श्रीकांत वर्मा ने जात पर न पात पर, इंदिराजी की बात पर, मुहर लगाना हाथ पर, नारा दिया था। इस नारे ने जमकर कमाल किया था। लोगों की जुबान पर भी चढ़ा और इसका प्रभावी असर भी देखने को मिला था।

विधानसभा चुनाव में गूंजे दिल को छू लेने वाले नारे

तीन महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य की सत्ता पर कांग्रेस काबिज थी। वापसी के लिए भाजपा ने एक बार फिर अटलजी को याद किया। प्रभावी नारे लाए। ‘हमने बनाया है हम ही संवारेंगे’, ‘अब नई सहिबो बदल के रहिबो’। इन दो नारों ने जमकर काम किया। अटलजी द्वारा बनाए छत्तीसगढ़ राज्य की याद दिला दी। गड़बड़ी व घोटाले के बाद सुशासन का यह नारा लोगों को प्रभावित किया। इन दो प्रभावी नारों के बीच मोदी की गारंटी ने जो काम किया वह जगजाहिर है। राज्य की सत्ता पर भाजपा की दमदार तरीके से वापसी हुई।

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    वर्ष 2007 में दिल्‍ली की भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता में पोस्‍ट ग्रैजुएट डिप्‍लोमा किया है। अध्‍ययन के बाद मैंने दिल्‍ली में अलग-अलग संस्‍थानाें में दो वर्ष सेवा दी। इसके बाद मैंने हिंदुस्‍तान न्‍यूजपेपर मे

Loksabha Election 2024: फर्स्‍ट टाइम वोटर्स बने भाजपा की बड़ी ताकत, आंकड़ों में जानिये पिछले चुनाव में पार्टी ने कहां बनाई पैठ

ऐसे मतदाताओं की भी अच्‍छी खासी संख्‍या बन गई जो पहली बार वोट डालेंगे, जो युवा हैं, जो शतायु हैं और जो ट्रांसजेंडर हैं।

By Navodit Saktawat

Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 01:59 PM (IST)

Up to date Date: Fri, 22 Mar 2024 02:03 PM (IST)

Loksabha Election 2024: फर्स्‍ट टाइम वोटर्स बने भाजपा की बड़ी ताकत, आंकड़ों में जानिये पिछले चुनाव में पार्टी ने कहां बनाई पैठ
फर्स्‍ट टाइम वोटर्स से भाजपा को बहुत उम्‍मीदें हैं।

HighLights

  1. देश में कुछ मतदाताओं की संख्‍या 96.8 करोड़ है।
  2. इनमें से 49.7 करोड़ पुरुष वोटर्स हैं।
  3. महिला वोटर्स की संख्‍या 47.1 करोड़ है।

चुनाव डेस्क, इंदौर। लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही सभी राजनीतिक दल अपने प्रचार अभियान में जुट गए हैं। सात चरणों में होने वाले मतदान का पहला चरण 19 अप्रैल से शुरू होगा। 4 जून को मतगणना पश्‍चात परिणाम घोषित होंगे। इस बार के चुनाव आंकड़ों की दृष्टि से कुछ विशेष हैं। देश में मतदाताओं की संख्‍या में तो इजाफा हुआ ही है, ऐसे मतदाताओं की भी अच्‍छी खासी संख्‍या बन गई जो पहली बार वोट डालेंगे, जो युवा हैं, जो शतायु हैं और जो ट्रांसजेंडर हैं।

चुनाव आयोग के अनुसार देश में कुछ मतदाताओं की संख्‍या 96.8 करोड़ है। इनमें से 49.7 करोड़ पुरुष वोटर्स हैं जबकि महिला वोटर्स की संख्‍या 47.1 करोड़ है। यहां उल्‍लेखनीय है कि 1.8 करोड़ ऐसे वोटर्स हैं जो पहली बार मतदान करेंगे। इन फर्स्‍ट टाइम वोटर्स से भाजपा को बहुत उम्‍मीदें हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल किया था। तब के चुनाव परिणामों पर गौर किया जाए तो पता चलता है कि बीजेपी (303 सीटें, 37.6% वोट शेयर) न केवल 2014 के मुकाबले अपना समर्थन आधार बरकरार रखने में कामयाब रही, बल्कि भौगोलिक और सामाजिक रूप से भी विस्तार किया।

गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, असम, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू और कश्मीर (जम्मू क्षेत्र) में, बीजेपी ने अपने 2014 के प्रदर्शन में सुधार किया। इसके साथ ही वोट शेयर भी बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो गया। असम और जम्मू-कश्मीर को छोड़ दिया जाए तो भाजपा ने 303 सीटों में 224 सीटों पर 50% से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की।

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गठबंधन के विरुद्ध प्रदर्शन, बढ़ाया भौगोलिक विस्‍तार

बंगाल, ओडिशा, त्रिपुरा और कुछ हद तक तेलंगाना में भाजपा का विजयी प्रदर्शन इसके दायरे में विस्तार को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र और झारखंड में, जहां पार्टियों ने भाजपा के खिलाफ गठबंधन बनाया, भाजपा ने इससे निष्‍प्रभावित होते हुए अपनी जगह ना केवल कायम रखी, बल्कि बढ़ाई भी।

ग्रामीण व अर्ध-शहरी मतदाताओं में पैठ

2019 के परिणाम से पता चलता है कि बीजेपी अपने शहरी वोटों को बरकरार रखते हुए ग्रामीण और अर्ध-शहरी मतदाताओं के बीच आगे बढ़ने में कामयाब रही। पिछले चुनाव में ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा का वोट शेयर 6.6%, अर्ध-शहरी में 3.5% और शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में 2.2% बढ़ा। अब इस बार 2024 के चुनाव परिणाम में यह पता चलेगा कि भाजपा ने अर्ध-शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पैठ कितनी बरकरार रखी है।

जाति-समुदाय का गणित उलटा

2019 में उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भाजपा ने जाति-समुदाय का गणित उलट दिया। इसका वोट शेयर सभी श्रेणियों के निर्वाचन क्षेत्रों में, साथ ही दलित, आदिवासी और मुस्लिम आबादी के विभिन्न अनुपात वाले निर्वाचन क्षेत्रों में भी बढ़ गया।

फर्स्‍ट टाइम वोटर बन सकता है

पिछले चुनाव में बीजेपी के लिए पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के समर्थन में बड़ी वृद्धि हुई थी। कई राज्यों में किसानों ने भी बड़ी संख्या में बीजेपी को वोट दिया था। यदि भाजपा इसी वोटबैंक को 2024 में भी कायम रख पाती है तो अबके चुनाव में ये फर्स्‍ट टाइम वोटर बीजेपी की बड़ी ताकत बन सकते हैं।

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    वर्तमान में नईदुनिया डॉट कॉम में शिफ्ट प्रभारी हैं। पत्रकारिता में विभिन्‍न मीडिया संस्‍थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में कार्य करने का 21 वर्षों का दीर्घ अनुभव। वर्ष 2002 से प्रिंट व डिजिटल में कई बड़े दायित्‍वों

Rani Mukerji opens up about traumatic miscarriage, says she is pained as a result of she will’t give daughter Adira a sibling | मिसकैरेज को लेकर रानी मुखर्जी का दर्द: बोलीं- चाहती थी बेटी को उसके भाई-बहन मिलें, अब बच्चे करने की उम्र नहीं रही

41 मिनट पहले

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मिसकैरेज को लेकर रानी मुखर्जी का दर्द छलका है। रानी ने कहा कि वे अपनी बेटी अदीरा को छोटा भाई या बहन देना चाहती थीं। वे नहीं चाहती थीं कि बेटी अकेली रहे। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रेग्नेंसी प्लानिंग की थी, लेकिन दुर्भाग्य से उनका मिसकैरेज हो गया।

रानी ने कहा कि उन्होंने 7 साल तक कोशिश की, कि उन्हें एक और बच्चा हो जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। रानी ने कहा कि वो अब 46 साल की होने वाली हैं। अब जो होना था, वो हो चुका है। यह उम्र अब बच्चे पैदा करने की नहीं है।

रानी ने कहा- वो समय बहुत चुनौतीपूर्ण था
रानी मुखर्जी ने Galatta India से कहा- मेरी बेटी आज 8 साल की हो गई है। जब वो डेढ़ साल की थी तभी मैंने दूसरे बच्चे के लिए प्लानिंग कर ली थी। मैं कोशिश करती रही, प्रेग्नेंट भी हो गई। हालांकि मैंने अपने इस बच्चे को खो दिया। ये मेरे लिए बहुत टेस्टिंग टाइम था। मैं बिल्कुल ट्रॉमा में चली गई थी।

दुख है कि बेटी को उसके भाई-बहन से नहीं मिला सकी
रानी ने आगे कहा- मैं अब 46 साल की होने वाली हूं। बच्चे पैदा करने की यह कोई उम्र नहीं है। यह बहुत दुख की बात है कि मैं अपनी बेटी को उसके भाई-बहन से नहीं मिला सकी। यह बात मुझे बहुत दर्द देती है। हालांकि मैं सोचती हूं कि हमें जो भी मिला है, उसके लिए भगवान का हमेशा शुक्रगुजार होना चाहिए। अदीरा मेरे लिए एक चमत्कार की तरह है। उसे पाकर मैं बहुत खुश हूं। मेरे पास सिर्फ उसका रहना ही बहुत है।

2021 में मां बनने वाली थीं रानी, 5 महीने के बच्चे का हुआ था मिसकैरेज
2023 में रानी मुखर्जी 14वें इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न का हिस्सा बनी थीं। इस दौरान उन्होंने अपने मिसकैरेज का खुलासा किया था। रानी ने बताया कि कोविड महामारी के बीच वो साल 2020 में प्रेग्नेंट हुई थीं। उनकी प्रेग्नेंसी को 5 महीने हो चुके थे, लेकिन फिर उनका मिसकैरेज हो गया। रानी ने इस बात को राज रखा, क्योंकि उनका मानना था कि लोग इसे फिल्म प्रमोशन की स्ट्रैटजी समझते।

नेशनल हैंडबाल टूर्नामेंट में इंडियन रेलवे सिरमौर, टीम में पांच खिलाड़ी बिलासपुर जोन की

उत्तर प्रदेश के हाथरस में आयोजित थी 52 वीं राष्ट्रीय सीनियर महिला हैंडबाल प्रतियोगिता

By Manoj Kumar Tiwari

Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 03:03 PM (IST)

Up to date Date: Fri, 22 Mar 2024 03:03 PM (IST)

नेशनल हैंडबाल टूर्नामेंट में इंडियन रेलवे सिरमौर, टीम में पांच खिलाड़ी बिलासपुर जोन की

बिलासपुर। उत्तर प्रदेश के हाथरस में आयोजित 52वीं राष्ट्रीय सीनियर महिला हैंडबाल प्रतियोगिता में भारतीय रेलवे टीम सिरमौर रही। विजेता टीम में पांच खिलाड़ी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की शामिल थीं। जिनका प्रदर्शन शानदार रहा। जीत में उनकी भूमिका अहम रही।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की इन महिला हैंडबाल खिलाड़ियों में टेक्नीशियन विभाग की काजल, निकी, पंकज, गौरव, यांत्रिक विभाग की मीनू शामिल रहीं। इस शानदार प्रदर्शन के बाद खिलाड़ी लौट गईं है। भारतीय रेलवे के साथ ही दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन हमेशा से खेल एवं खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देता है। प्रतियोगिता के साथ अभ्यास के लिए भी पर्याप्त समय दिया जाता है, ताकि वह अपने अभिभावकों के साथ बिलासपुर रेलवे जोन का नाम रोशन कर सके। प्रतियोगिता में मिली सफलता इसी का परिणाम है।

इसके साथ ही दक्षिण पूर्व रेलवे की अन्य खिलाड़ियों ने भी विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंततराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी छाप छोड़ी है। भारतीय रेलवे की महिला हैंडबाल टीम एवं उसमें शामिल दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के खिलाड़ियों को उनके शानदार प्रदर्शन एवं उपलब्धि पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन के महाप्रबंधक व अन्य रेलवे अधिकारियों द्वारा बधाई दी गई है। इसके साथ ही भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया।

तीरंदाजी में मधु वेदवान ने जीता सिल्वर मेडल

हैंडबाल के साथ ही तीरंदाजी में भी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की महिला खिलाड़ी मधु वेदवान ने मान बढ़ाया है। बिलासपुर मुख्यालय के भंडार विभाग में जूनियर क्लर्क के पद पर पदस्थ मधु वेदवान ने तीसरी खेलो इंडिया नेशनल रैंकिंग महिला तीरंदाजी टूर्नामेंट में दूसरा स्थान प्राप्त दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को गौरवान्वित किया है। महाप्रबंधक व अन्य अधिकारियों ने इस खिलाड़ी के बेहतर प्रदर्शन पर प्रशंसा जाहिर की और इसी तरह आगे भी अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद जताई।

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    वर्ष 2010 में गुरु घासीदास विश्‍वविद्यालय, बिलासपुर से ग्रेजुएशन किया है। तत्पश्चात शिक्षा एवं कार्य को आगे बढ़ते हुए मैं दैनिक प्रजापति, इवनिंग टाइम्स एवं लोकस्वर में पत्रकारिता करियर की शुरुआत की 2012—13 मैंन