Narsinghpur Information : आंगनबाड़ी के बच्चे नहर किनारे पहुंचे और घर में आराम फरमाती रही संचालिका
Narsinghpur Information : किराये की लालच में घर में बना ली आंगनबाड़ी, आंगनबाड़ी संचालिका की लापरवाही के चलते तीन परिवार के घरों के चिराग बुझ जाते।
By Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 21 Mar 2024 11:45 AM (IST)
Up to date Date: Thu, 21 Mar 2024 12:51 PM (IST)

HighLights
- बरहटा में नहर के किनारे खेल रहे थे, टला हादसा।
- आंगनबाड़ी से तीन मासूम हुए गायब।
- सकुशल पाकर पालकों ने किया ईश्वर का धन्यवाद।
Narsinghpur Information : नईदुनिया प्रतिनिधि, बरहटा नरसिंहपुर। आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले मासूम कब नहर किनारे पहुंच गए ये आंगनबाड़ी संचालिका को पता ही नहीं चला। संचालिका को अपनी आंगनबाड़ी में से मदारत् बच्चों की जानकारी भी नहीं लगी। वही बच्चे, गहरी नहर के किनारे खेल रहे थे, पालकों को जब इसकी सूचना मिली तो वे तत्काल ही नहर किनारे घबराए हुए जहां सकुशल बच्चों का खेलता देखकर उन्होने राहत की सांस ली और उन्हे परिजनों ने गले लगाते हुए भगवान का शुक्रिया अदा किया, कि एक बड़ी घटना टल गई।
बरहटा में नहर के किनारे खेल रहे थे, टला हादसा
मामला जिला नरसिंहपुर स्थित बरहटा ग्राम का है, जहां आंगनबाड़ी में। 20 मार्च की दोपहर 12.30 बजे के करीब तीनों बच्चों ने बाथरूम जाने की बात की, जिस पर आंगनबाड़ी संचालिका ने उन्हे जाने दिया। लेकिन बच्चे बाहर निकलकर सीधे नहर किनारे पहुंच गए और वहां खेलने लगे। गहरी नहर और उसमें बह रहे पानी के तेज बहाव को देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है, कि अगर बच्चे उस नहर में उतर जाते तो कितना बड़ा हादसा हो सकता था, वही आंगनबाड़ी संचालिका की लापरवाही के चलते तीन परिवार के घरों के चिराग बुझ जाते।
किराये की लालच में घर में बना ली आंगनबाड़ी
आंगनबाड़ी संचालिका के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये से नाराज ग्राम के रहवासियों ने बताया कि आंगनबाड़ी संचालिका अपने घर में ही आंगनबाड़ी का संचालन करती है, उन्होने स्वंय के घर को किराए से संचालन के लिए दे दिया है, जिसके चलते उन्हे भी सुविधा मिल रही है। लोग बताते है, कि नए भवन में सभी सुविधाएं मौजूद हैं, जिसमें बाथरूम भी है और बच्चे बाहर निकल न पाए इसके लिए मुख्य द्वार पर गेट भी मौजूद है, मगर मैडम का कहना है, कि हमारे मन की आंगनबाड़ी नहीं बनी है इसलिए वे अपने घर में ही किराया लेकर संचालन कर रही है।
आए मायके में है आना जाना, संचालिका की ससुराल जबलपुर में है
यहां पर आक्रोशित लोगों का कहना है, कि संचालिका की ससुराल जबलपुर में हैं, वह बीच में गोलमार कर जबलपुर चली जाती है। गांव के बाहर कोई पूछने वाला भी नहीं है, जिसका फायदा वे जमकर उठा रही है। एक ओर जहां वे आंगनबाड़ी के लिए अपना घर किराए पर देकर किराया वसूल रही है। वही घर में ही आंगनबाड़ी होने का लाभ वे घर के काम कर उठा रही है। प्रत्यक्ष उदाहरण बुधवार की दोपहर घटी ये घटना है, बच्चों ने बताया कि, मैडम अपने घर का काम कर रही थी और वे रोजाना ही सभी बच्चों को एक कमरे में बैठाकर अपने घर का काम न केवल स्वंय करती है, बल्कि बच्चों से भी काम करवाती है।
ऐसे लगी परिजनों को जानकारी
आंगनबाड़ी केन्द्र अपने बच्चे को लेने पहुंची एक बच्चे की मां को जब उसका बच्चा नहीं मिला तो उन्होने संचालिका से पूछा जिस पर संचालिका भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाई, मां राजकुमारी बच्चों को तलाश में गई और जब दूसरे बच्चे से बच्चों के बारे में पूछा तो बच्चे ने बताया, तीनों बच्चे नहर की ओर जाते हुए देखे गए है, जिसमें गुम हुए बच्चे सोय यादव के पिता जमुना प्रसाद स्वयं मोटरसाइकिल से नहर पर बच्चों को देखने गए, तीसरा बच्चा राहुल यादव आत्मज लक्ष्मण यादव और मां रोशनी यादव ने भी जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से बच्चों के बारे में पूछा, तो उन्हे भी संचालिका कुछ नहीं बता पाई। इन सभी को जानकारी लगने पर वे भी नहर किनारे पहुंचे जहां अपने बच्चे को सकुशल देखकर उनकी जान में जान आई। घटना से गुस्साए मुड़िया निवासी ग्रामीणजनों ने शासन से मांग की गई है, कि जब तक आंगनबाड़ी नए भवन में लगना प्रारंभ नहीं होती है तब तक वे अपने बच्चों को नहीं भेजेंगे।


