Bollywood Trend Designer Neeta Lulla Costumes Story | Hrithik Roshan Devdas Saree | एक रात में तैयार किया ऐश्वर्या का कॉस्ट्यूम: जूही चावला के लिए ढाई घंटे में बनाई ड्रेस; नीता लुल्ला बोलीं- ऋतिक को कपड़ों की अच्छी समझ

मुंबई12 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी और अभिनव त्रिपाठी

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मुंबई के बांद्रा वेस्ट के टर्नर रोड पर नीता लूल्ला का स्टोर है। अपने 40 साल के करियर में इन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग की है। - Dainik Bhaskar

मुंबई के बांद्रा वेस्ट के टर्नर रोड पर नीता लूल्ला का स्टोर है। अपने 40 साल के करियर में इन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग की है।

आपने देवदास, जोधा अकबर और मणिकर्णिका जैसी फिल्मों की भव्यता तो देखी ही होगी। इसे भव्य बनाने में फिल्म में यूज किए गए कॉस्ट्यूम्स का बहुत बड़ा रोल है। ऐश्वर्या राय बच्चन की भारी-भरकम साड़ी से लेकर माधुरी दीक्षित के वजनदार लहंगे को बनाने के पीछे सेलिब्रिटी कॉस्ट्यूम डिजाइनर और स्टाइलिस्ट नीता लुल्ला का हाथ है।

नीता लुल्ला ने देवदास के लिए एक ही रात में ऐश्वर्या की साड़ी बना दी थी। इसके अलावा यश चोपड़ा की डिमांड पर सिर्फ ढाई घंटे के अंदर जूही चावला के लिए ड्रेस तैयार कर दी थी। नीता लुल्ला को उनके काम के लिए चार नेशनल अवॉर्ड भी मिले हैं।

रील टू रियल के इस एपिसोड में हम नीता लुल्ला से कॉस्ट्यूम डिजाइन की बारीकियों को समझेंगे। इन्होंने जिन फिल्मों के लिए काम किया है, उसकी बैकग्राउंड स्टोरी भी जानेंगे। स्टार्स के साथ इनकी ट्यूनिंग कैसी है, इस पर भी बात करेंगे।

आगे जाने से पहले इस ग्राफिक्स पर नजर डालिए..

देवदास के लिए तीन साड़ियों को मिलाकर एक ड्रेस बनाई थी
फिल्म देवदास में ऐश्वर्या और माधुरी दीक्षित के कपड़ों को डिजाइन करने का जिम्मा डायरेक्टर संजय लीला भंसाली ने नीता लुल्ला को दिया था। इस पर बात करते हुए नीता ने कहा, ‘देवदास पर तीन फिल्में पहले ही बन चुकी थीं। संजय ने हमें वो तीनों फिल्में दिखाईं। मैंने उनसे कहा कि इन फिल्मों में जो कॉस्ट्यूम यूज किए गए हैं, वो काफी सिंपल है। संजय ने कहा कि उन्हें अपनी फिल्म को लार्जर दैन लाइफ दिखाना है, इसके लिए एक्टर्स के कॉस्ट्यूम को जितना हो सके, रिच दिखाओ।

फिर मैंने कहा कि यह फिल्म बंगाली बैकग्राउंड पर बेस्ड होगी और बंगाल में साड़ियों की लेंथ 5 मीटर ही होती है। मैंने तीन साड़ियां मिलाकर एक साड़ी बनाई। मतलब एक ड्रेस बनाने के लिए मैंने तीन-तीन कपड़ों का इस्तेमाल किया। आप देखेंगे कि ऐश्वर्या और माधुरी ने देवदास में जितने भी ड्रेसेस पहने हैं, वो सारी दो-तीन साड़ियों को काट कर बनाई गई हैं। देवदास के वक्त पहली बार ऐसा हुआ कि कॉस्ट्यूम डिजाइनर को भी एक असिस्टेंट मिला हुआ था।’

जोधा अकबर में खास तरह की कढ़ाई वाला ड्रेस तैयार किया गया था
जोधा अकबर के वक्त भी डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर ने कॉस्ट्यूम डिजाइन का पूरा जिम्मा नीता लुल्ला को दे दिया था। फिल्म में कैसा कॉस्ट्यूम देना है, इसके लिए नीता ने आर्ट डायरेक्टर से लेकर कैमरा मैन तक से बात की थी।

नीता कहती हैं, ‘जोधा अकबर के लीड कैमरा मैन किरण देवहंस नेचुरल लाइटिंग में शूट करना चाहते हैं। नेचुरल लाइट में सिल्क का कपड़ा बहुत चमकता है, इससे पार पाना मेरे लिए एक चैलेंज की तरह था। इसके लिए मैंने एक स्पेशल जरदोजी वर्क की कढ़ाई वाला कपड़ा तैयार किया। यह एक्सपेरिमेंट सफल रहा। इस तरह करके मैंने कॉस्ट्यूम डिजाइन में भी कई टेक्नीक डेवलप किए हैं।’

जरदोजी फारसी और उर्दू शब्द है। यह एक प्रकार की कढ़ाई होती है, जो भारत और पाकिस्तान में काफी ज्यादा प्रचलित है।

फिल्म जोधा अकबर में ऐश्वर्या का एक सीन। इसमें ऐश्वर्या ने जो साड़ी पहनी है, उसे नीता ने ही डिजाइन किया है।

फिल्म जोधा अकबर में ऐश्वर्या का एक सीन। इसमें ऐश्वर्या ने जो साड़ी पहनी है, उसे नीता ने ही डिजाइन किया है।

ऋतिक रोशन को ड्रेसिंग की बहुत अच्छी समझ
नीता लुल्ला ने कहा कि कुछ एक्टर्स ऐसे भी हैं, जिन्हें ड्रेसिंग की बहुत अच्छी समझ है। इनमें ऋतिक रोशन का भी एक नाम है। नीता ने कहा, ‘अगर ऋतिक के कपड़ों की थोड़ी भी गलत सिलाई हुई, उन्हें तुरंत पता चल जाता है। वो मुझसे इसकी शिकायत भी करते हैं। मैं जब चेक करती हूं तो उनकी बात सच निकलती है। इसके अलावा आमिर खान को भी फैशन की अच्छी समझ है। वो भी इन बारीकियों को समझते हैं।’

कॉस्ट्यूम पर हुए खर्चे की बात करें तो 2000 से लेकर 2010 के बीच में जितनी फिल्में बनी हैं, उनमें जोधा अकबर सबसे महंगे बजट की फिल्म है।

कॉस्ट्यूम पर हुए खर्चे की बात करें तो 2000 से लेकर 2010 के बीच में जितनी फिल्में बनी हैं, उनमें जोधा अकबर सबसे महंगे बजट की फिल्म है।

फिल्म रूप की रानी चोरों का राजा के कॉस्ट्यूम्स पर काफी पैसे लगे थे
नीता लुल्ला का दिवंगत एक्ट्रेस श्रीदेवी से बहुत अच्छा संबंध था। श्रीदेवी उन्हें कपड़ों के बारे में बहुत अच्छी जानकारी देती थीं। नीता ने कहा, ‘श्रीदेवी जी को यह भी पता रहता था कि व्हाइट कलर में कितने शेड्स होते हैं। उन्हें फैशन और फैब्रिक की बहुत अच्छी जानकारी थी। उनकी फिल्म रूप की रानी चोरों का राजा में कॉस्ट्यूम पर काफी ज्यादा पैसे खर्च किए गए थे। कॉस्ट्यूम्स के मामले में यह 90 के दशक की सबसे महंगी फिल्म थी।’

देवदास के लिए एक रात में तैयार हुए कॉस्ट्यूम्स
कपड़े डिजाइन करने में कितना वक्त लगता है? जवाब में नीता ने कहा, ‘फिल्म इंडस्ट्री कभी आपको ज्यादा समय नहीं देती। आपको यकीन नहीं होगा, लेकिन देवदास के लास्ट सीन में जहां ऐश्वर्या की साड़ी जलती है, उसे हमने एक रात में बना दिया था।

इस सीन में ऐश्वर्या ने जो साड़ी पहनी है, उसे कई साड़ियों को मिलाकर बनाया गया था।

इस सीन में ऐश्वर्या ने जो साड़ी पहनी है, उसे कई साड़ियों को मिलाकर बनाया गया था।

ऐसे ही डर में जूही चावला का तांडव डांस वाले सीन के लिए ड्रेस डिजाइन करना था। यश चोपड़ा जी का मेरे पास अर्जेंट कॉल आया। उन्होंने मुझसे कहा कि शूट का आखिरी दिन है और आपके पास सिर्फ ढाई घंटे हैं, आप कैसे भी करके ड्रेस डिजाइन करके दीजिए। मैंने तुरंत अपने वर्कशॉप पर फोन किया और टेलर मास्टर को काम शुरू करने का निर्देश दिया। रास्ते से मैंने कुछ शिफॉन के कपड़े उठा लिए। इस तरह हमने तय समय में यश जी को वो ड्रेस मुहैया करा दी।’

देवदास के बाद लड़कियों में साड़ी पहनने का चलन शुरू हुआ
नीता ने कहा कि देवदास के बाद उनके पास कई लड़कियों के लेटर्स आए थे। चूंकि उस वक्त फोन का उतना एक्सेस नहीं था। नीता ने कहा, ‘2000 के आस-पास मानसिकता थी कि साड़ी सिर्फ औरतें ही पहनती हैं। कांजीवरम और धर्मावरम की साड़ियों को ‘मम्मी साड़ी’ की संज्ञा दी जाती थी। मुझे यह देख कर अजीब लगता था। मैं हैदराबाद से हूं, वहां कांजीवरम और धर्मावरम साड़ियां बहुतायत संख्या में बनती हैं। इन्हें बनाने में हाथ का सबसे ज्यादा प्रयोग होता है। इन्हें दोबारा फैशन में लाने के लिए मैंने पैठनी और कांजीवरम के लिए प्रयोग होने वाले धागों से वेस्टर्न ड्रेसेज बनाने शुरू किए।

हालांकि, सबसे बड़ा बदलाव देवदास आने के बाद हुआ। मानसिकता थोड़ी बदलने लगी। लड़कियां मुझे लेटर में लिखतीं कि देवदास देखने के बाद वे भी अपनी मां और दादी की पुरानी साड़ियों को निकालकर पहनने लगीं। ऐसे यह मिथ टूट गया कि साड़ी सिर्फ औरतें ही पहनती हैं।’

माधुरी और ऐश्वर्या दोनों के कॉस्ट्यूम्स को बनाने के पीछे नीता की कई महीनों की मेहनत थी।

माधुरी और ऐश्वर्या दोनों के कॉस्ट्यूम्स को बनाने के पीछे नीता की कई महीनों की मेहनत थी।

लोगों ने कॉस्ट्यूम डिजाइन को सीरियसली लेना शुरू किया
नीता लुल्ला के मुताबिक, ‘हम दिल दे चुके सनम’ के बाद लोगों ने फिल्मों में यूज होने वाले कॉस्ट्यूम पर भी चर्चा करनी शुरू की। लोगों को हीरो- हीरोइन के कपड़ों में इंटरेस्ट आना शुरू हुआ। फिल्म फेयर और स्टारडस्ट जैसी फिल्मी मैगजीन ने भी कॉस्ट्यूम के बारे में लिखना शुरू कर दिया।’

कॉस्ट्यूम डिजाइन करते वक्त नीता क्या ध्यान देती हैं?
नीता लुल्ला ने कहा, ‘मैं सबसे पहले उस कैरेक्टर के बारे में सोचती हूं। मान लीजिए पुराने समय के किसी राजा का किरदार है, तो मैं पहले रिसर्च करती हूं कि वो राजा अपने समय में क्या पहनता होगा। फिर इसके हिसाब से एक स्केच बनाती हूं। स्केच के हिसाब से ड्रेस डिजाइन करती हूं। इसके बाद एक्टर्स की भी राय लेनी पड़ती है। उन्हें किस टाइप के कपड़े चाहिए। कौन सा कपड़ा उनके लिए कंफर्टेबल होगा, ये सारी चीजें उनसे पूछनी पड़ती हैं।’

नीता मेल कॉस्ट्यूम भी डिजाइन करती हैं। इसमें दिख रही ड्रेस साउथ स्टार पवन कल्याण के लिए बनाई गई थी।

नीता मेल कॉस्ट्यूम भी डिजाइन करती हैं। इसमें दिख रही ड्रेस साउथ स्टार पवन कल्याण के लिए बनाई गई थी।

हस्तकला में माहिर बुनकरों को समाप्त होने से बचाना होगा
नीता के डिजाइन किए कपड़ों में मेक इन इंडिया की भी झलक देखने को मिलती है। नीता चाहती हैं कि हाथ से बनने वाले कपड़ों को ज्यादा से ज्यादा महत्व मिले। उन्होंने कहा, ‘हाथ से बनने वाले कपड़े धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं। जो हमारे बुनकर हैं, उनकी अच्छी कमाई नहीं हो पा रही है। वे अपने बच्चों को भी इस फील्ड में भेजने से कतरा रहे हैं। हमें कैसे भी करके उनके टैलेंट को वेस्ट होने से बचाना होगा। हस्तशिल्प हमारे देश की पहचान है। यह किसी भी दशा में खत्म नहीं होनी चाहिए।’

नीता के स्टोर पर हाथ से बनाए कपड़े भी देखने को मिलेंगे। नीता ने कहा कि उन्हें बुनकरों के साथ काम करना सबसे अच्छा लगता है।

नीता के स्टोर पर हाथ से बनाए कपड़े भी देखने को मिलेंगे। नीता ने कहा कि उन्हें बुनकरों के साथ काम करना सबसे अच्छा लगता है।

हॉलीवुड फिल्मों के लिए भी कॉस्ट्यूम डिजाइन कर चुकी हैं नीता
नीता ने 4-5 हॉलीवुड फिल्मों के लिए भी कॉस्ट्यूम डिजाइन का काम किया है। हॉलीवुड में कॉस्ट्यूम डिजाइनर को एक टेक्नीशियन के तौर पर ज्यादा देखा जाता है। नीता ने कहा कि हॉलीवुड में कॉस्ट्यूम डिजाइनर और एक्टर्स के बीच बातचीत नहीं होती। नीता ने कहा, ‘मैंने जब भी हॉलीवुड फिल्मों के लिए काम किया है, हमेशा डायरेक्टर के साथ क्राफ्ट पर चर्चा करती हूं। ड्रेसेस कौन से होंगे, इसका डिसीजन डायरेक्टर ही लेता है। एक्टर्स का इसमें कोई रोल नहीं होता है।’

ऑस्कर अवॉर्ड्स में ज्यूरी मेंबर के तौर पर आपका रोल क्या है? जवाब में नीता ने कहा, ‘मुझे बहुत सारी फिल्में देखनी पड़ती हैं। इन्हें जज करना पड़ता है। अब ज्यूरी के अलावा मुझे एक और रोल दे दिया गया है। म्यूजियम में कौन से कपड़े रखने हैं, इसके सिलेक्शन के लिए मुझे इंटरनल कमेटी का मेंबर बनाया गया है।’

नीता फैशन और कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग का कोर्स भी कराती हैं। इनकी टीम में 100 लोग काम करते हैं।

नीता फैशन और कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग का कोर्स भी कराती हैं। इनकी टीम में 100 लोग काम करते हैं।

ऑर्डर पर एक्सक्लूसिव ड्रेसेस डिजाइन करती हैं नीता
नीता लुल्ला के यहां ड्रेसेस के तीन रेंज रखे गए हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारे यहां तीन तरह के रेंज हैं। आप ऑर्डर देकर ड्रेस बनवा सकते हैं। ये ऐसे कपड़ों के बने होंगे जो आपको किसी दूसरी जगह नहीं मिलेंगे। दूसरी रेंज ऐसी है, जिसे आसानी से अफोर्ड किया जा सकता है। बाकी तीसरी रेंज बच्चों के लिए है। इस रेंज में सिर्फ बच्चों के लिए डिजाइनर क्लॉथ मिलते हैं।’