Gariyaband Information: एक ऐसा गांव भी, जंहा के लोग जन्मदिन और सालगिरह के मौके पर करते है रक्तदान
मालगांव निवासी ग्रामीण युवा ब्लड डोनर ग्रुप के संस्थापक व समाजसेवी भीम निषाद ( उम्र 35 वर्ष ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव ) बताते है कि उनकी बहन को पहली बार रक्तदान किया था जिससे उनकी जान बच गई इसके बाद से उन्होंने रक्तदान की अहमियत को जाना । वे कहते है को रक्तदान को महादान का दर्जा दिया गया है , क्योंकि आपका यह दान किसी इंसान की जिन्दगी बचा सकता है।
वे इसके लिए अपने गांव के अलावा आसपास के गांव के लोगों को भी रक्तदान के लिए लगातर जागरूक करते है वे खुद अब तक 18 बार रक्तदान कर चुके है । और इनके परिवार के 25 सदस्य भी लगातार रक्तदान करते है । गरियाबंद के ग्रुप से जुड़कर 2022 में 1004 , 2023 में 840 और पिछले 3 माह में 330 कुल 2174 डोनर रक्तदान कर चुके है ।
राजधानी तक उपलब्ध करा रहे निशुल्क रक्त
इस गांव में 100 युवाओं की टोली लगातार 3 सालो से रक्तदान शिविर का आयोजन कर मानव सेवा के कार्य मे निरन्तर लगे हुए है, यंहा के सभी युवा ग्रामीण युवा ब्लड डोनर ग्रुप व गरियाबंद ब्लड डोनर ग्रुप के साथ जुड़ कर रक्तदान शिविर के माध्यम से व जिला अस्पताल गरियाबंद में निरंतर रक्तदान कर सेवा का कार्य कर रहे है।
मालगांव के साथ साथ आप-पास के गांव कोदोबतर, बारुका, बहेराबुड़ा, घुटकुनवापारा, भेजराडीह, हरदी, कस, सोहागपुर, मजरकट्टा, भिलाई, पाथरमोहन्दा, चिखली और अन्य गांव के युवा निरंतर सेवा कर जिला अस्पताल गरियाबंद के साथ-साथ राजिम, नयापारा, छुरा, महासमुंद, धमतरी व रायपुर के मेकाहारा, एम्स जैसे बड़े बड़े हॉस्पिटलो में जरूरतमंद मरीजो को आसानी से ब्लड उपलब्ध करा रहे है।
मालगांव वासी हर साल लगाते है रक्तदान शिविर
मालगांव के ग्रामीण कहते है । कि क्षेत्र के मरीजो को कभी ब्लड की कमी से मौत ना हो इस उद्देश्य को लेकर पिछले तीन सालों से जिले भर में अलग अलग जगहों पर समय समय पर रक्तदान शिविर का आयोजन करते है, और लोगो से अपील करते हुए हर साल ग्राम मालगांव के रक्तदान त्यौहार में आस-पास क्षेत्र के सभी ग्रामों के युवाओं, गणमान्य नागरिक, लड़की व महिलाओं को बड़ी संख्या में रक्तदान करने के लिए प्रेरित करते है । मालगांव में 2022 में लगे शिविर में 81 यूनिट 2023 में 85 यूनिट और 17 मार्च को हुए शिविर में 108 यूनिट रक्तदान किया है ।
रक्तदान के लिए दिव्यांग चम्पेश्वर ध्रुव पेश कर रहे मिसाल
17 मार्च को ग्राम मालगांव में लगे रक्तदान शिविर में रक्तदान करने पहुँचे लोगो मे ग्राम कस के निवासी दिव्यांग चम्पेश्वर ध्रुव ( ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव ) उम्र 30 वर्ष पहुँचे थे चम्पेश्वर एक पैर से दिव्यांग है उन्होंने बताया कि एक दुर्घटना के दौरान उनका एक पैर कट गया था उस वक्त 10 बॉटल रक्त लगने के बाद उनकी जान बची थी तब से उन्होंने रक्तदान करना शुरू किया है।
आज चम्पेश्वर रक्तदान के लिए अपने गांव सहित आसपास के क्षेत्र में एक मिसाल पेश कर रहे है । चम्पेश्वर बताते है कि वे अब तक कुल 13 बार रक्दान कर चुके है । और जब भी रक्त की जरूरत पड़ती है वे सबसे पहले उपलब्ध होते है ।
कन्हैया रोहरा पत्नी और बेटे के साथ रक्तदान करने पहुंचे
मालगांव में लगे रक्तदान शिविर में गरियाबंद व्यवसायी कन्हैया रोहरा उम्र 62 वर्ष अपनी पत्नी आशा रोहरा उम्र 58 वर्ष पुत्र रितेश रोहरा उम्र 35 वर्ष के साथ रक्तदान शिविर में रक्तदान करने पहुंचे इस दौरान उनके पोते और पोती भी साथ में मौजूद थे ।
पुलिस के जवानों ने ड्यूटी में रहते हुए निभाई रक्तदान की जिम्मेदारी
मालगांव में आयोजित रक्तदान शिविर में गरियाबंद पुलिस के जवान भी बड़ी संख्या में रक्तदान में पहुंचे । इस दौरान लगभग 11 जवानों ने रक्तदान किया । रक्तदान के दौरान ज्यादातर जवान ड्यूटी में थे ।
उन्होंने बताया कि जनता की सुरक्षा करना उनकी प्राथमिकता है ही मगर रक्तदान से किसी जरूरतमंद की जान बचाई जा सकती है इसलिए वह ड्यूटी से कुछ समय निकाल कर रक्तदान करने पहुंचे है ।

