प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद काशी, तमिल संगमम और सौराष्ट्र-तमिल संगमम जैसे आयोजनों के जरिए तमिल संस्कृति को सनातन से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
By Sandeep Chourey
Publish Date: Sat, 16 Mar 2024 10:01 AM (IST)
Up to date Date: Sat, 16 Mar 2024 10:01 AM (IST)
HighLights
- डीएमके सरकार ने अब भगवान मुरुगन पर एक ग्लोबल कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का ऐलान किया है।
- लोकसभा चुनाव से पहले इस तरह की कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं।
- रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद तमिलनाडु में सनातन की बढ़ती लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है।
नीलू रंजन, नई दिल्ली। मलेरिया, एड्स और कोरोना जैसी महामारी से सनातन धर्म की तुलना करने वाली डीएमके पार्टी अब खुद ही सनातन धर्म की शरण में आ गई है। कभी भगवान के अस्तित्व को नकारने और सनातन धर्म के मूल्यों के खिलाफ राजनीति करने वाली तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने अब भगवान मुरुगन पर एक ग्लोबल कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का ऐलान किया है। लोकसभा चुनाव से पहले इस तरह की कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। इसे अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद तमिलनाडु में सनातन की बढ़ती लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है।
भगवान मुरुगन के सहारे डीएमके
तमिलनाडु में सनातन धर्म की बढ़ती लोकप्रियता से घबराई हुई डीएमके ने अब तमिल भगवान मुरुगन पर सियासत करने का फैसला लिया है। दरअसल बीते 60 साल से DMK का हिंदी विरोध और तमिल अस्मिता का कार्ड अब धीरे-धीरे कमजोर होने लगा है। ग्लोबल कॉन्फ्रेंस के जरिए DMK की कोशिश भगवान मुरुगन को तमिल भगवान के रूप में स्थापित करने की होगी, ताकि भगवान राम और सनातन की बढ़ती लोकप्रियता से मुकाबला किया जा सके।
तमिल संस्कृति का सनातन से संबंध
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद काशी, तमिल संगमम और सौराष्ट्र-तमिल संगमम जैसे आयोजनों के जरिए तमिल संस्कृति को सनातन से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। तमिलनाडु में भाजपा की रैलियों में बढ़ती भीड़ यह संकेत भी दे रही है कि राज्य में पार्टी का जनाधार तेजी से बढ़ रहा है। वहीं दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी तमिलनाडु में चौंकाने वाले नतीजे आने का दावा कर रहे हैं।
सनातन परंपरा से हैं भगवान मुरुगन
DMK की राजनीति भले ही भगवान मुरुगन को तमिल भगवान और तमिल संस्कृति से जोड़ने की है, लेकिन खुद भगवान मुरुगन भी सनातन परंपरा से जुड़े हुए हैं। भगवान मुरुगन को भगवान शिव का बड़ा बेटा और भगवान गणेश का भाई माना जाता है। उत्तर भारत में भगवान गणेश के भाई के रूप में कार्तिकेय का जिक्र मिलता है। पौराणिक मान्यता भी यह है कि भगवान कार्तिकेय और भगवान मुरुगन एक ही है।






