Balaghat Information : स्वजनों ने कर दी तेरहवीं, 15 साल बाद जिंदा मिला, पढ़ें क्‍या है पूरा मामला

Balaghat Information : स्वजनों ने कर दी तेरहवीं, 15 साल बाद जिंदा मिला, पढ़ें क्‍या है पूरा मामला

Balaghat Information : मामला जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र पाथरी के ग्राम लहंगाकन्हार के सोमटोला का है।

Publish Date: Fri, 19 Jan 2024 03:05 PM (IST)

Up to date Date: Fri, 19 Jan 2024 03:08 PM (IST)

HighLights

  1. कलेक्टर ने रेडक्रास सोसाइटी के माध्यम से गुरुवार को 15 हजार रुपये का चेक उपलब्ध कराया है।
  2. बैगा समुदाय के 52 वर्षीय बृजलाल 15 साल पहले महाराष्ट्र रोजगार की तलाश में गए थे, भटक गए।
  3. शिक्षित न होने के कारण पहचान नहीं बता सकते थे, सिर्फ वह अपने गांव का नाम जानते थे।

Balaghat Information : बालाघाट, नईदुनिया प्रतिनिधि। रोजी-रोटी की तलाश में पलायन करने वाला युवक जब 15 साल तक वापस नहीं लौटा। स्वजनों ने उसे मरा समझकर तेरहवीं कर दी, लेकिन स्वजनों के उस समय होश फाख्ता हो गए, जब मालूम हुआ कि जिंदा है। कहानी फिल्मी जरूर है, लेकिन सच्चाई के बेहद करीब है। मामला जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र पाथरी के ग्राम लहंगाकन्हार के सोमटोला का है। यहां रहने वाले बैगा समुदाय के 52 वर्षीय बृजलाल 15 साल पहले महाराष्ट्र रोजगार की तलाश में गए थे, लेकिन वह भटक गए।

नागपुर रोजगार के लिए गया था, लेकिन भटक गए

सामाजिक कार्यकर्ता भुवन कुर्राम ने बताया कि अभी बृजलाल झारखंड के जमशेदपुर में हैं, वापस लाने के लिए वैरिफिकेशन का कार्य कराया जा रहा है। दो दिन पहले कलेक्टर डा. गिरीश कुमार मिश्रा से बृजलाल को वापस लाने के लिए आर्थिक मदद मांगी थी, जिसके एवज में कलेक्टर ने रेडक्रास सोसाइटी के माध्यम से गुरुवार को 15 हजार रुपये का चेक उपलब्ध कराया है। संभवत: एक सप्ताह में बृजलाल को सकुशल घर लाया जाएगा। श्री कुर्राम ने बताया कि 15 साल पहले बृजलाल गांव के छह-सात लोगों के साथ नागपुर (महाराष्ट्र) रोजगार के लिए गए थे, लेकिन वह वहां भटक गए।

शिक्षित न होने के कारण हचान नहीं बता सके

शिक्षित न होने के कारण वह अपनी पहचान नहीं बता सकते थे। सिर्फ वह अपने गांव का नाम जानते थे। भटकते-भटकते वह केरल पहुंच गए, जहां उनने सुपारी के खेत में काम किया, नारियल पानी बेचा। इसके बाद वह हावड़ा, फिर मसूरी, दिल्ली जैसे शहरों तक पहुंच गए। जब वह झारखंड के जमशेदपुर पहुंचे, तब वहां के सामाजिक कार्यकर्ताओं की बृजलाल पर नजर पड़ी, जिसने उनसे गांव-पते के बारे में पूछा और हमारे संगठन से संपर्क किया। 15 साल बाद बृजलाल के जीवित होने की खबर मिलते ही स्वजनों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है।

admin

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