RTE से निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए नौ दिनों में आए 35 हजार से ज्यादा आवेदन, इस तारीख तक करें अप्लाई
Proper To Training: शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों में होने वाले प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया एक मार्च से शुरू हो गई है। नौ दिनों में ही 35 हजार से ज्यादा बच्चों के पंजीयन हो गए हैं।
By Ashish Kumar Gupta
Publish Date: Solar, 10 Mar 2024 03:19 PM (IST)
Up to date Date: Solar, 10 Mar 2024 03:18 PM (IST)

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। Proper To Training: शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों में होने वाले प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया एक मार्च से शुरू हो गई है। नौ दिनों में ही 35 हजार से ज्यादा बच्चों के पंजीयन हो गए हैं। प्रथम चरण में पंजीयन प्रक्रिया 15 अप्रैल तक चलेगी। फिर आवेदनों का सत्यापन, लाटरी और प्रवेश दिए जाएंगे। हर वर्ष सीटों की तुलना में ज्यादा आवेदन मिलते हैं, फिर भी सीटें खाली रह जाती हैं।
लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआइ) की तरफ से आरटीई प्रवेश प्रक्रिया की समय-सारिणी जारी कर दी गई है। प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश होता है। सीटों से ज्यादा आवेदन आने पर लाटरी के माध्यम से प्रवेश दिया जाता है। छात्र आवेदन के समय तीन स्कूलों का विकल्प भरते हैं।
शिक्षा सत्र में आरटीई की 4,887 सीटें हुई कम
पिछले शिक्षा सत्र की तुलना में इस शिक्षा सत्र में आरटीई की 4,887 सीटें कम हुई हैं। शिक्षा सत्र 2023-24 में आरटीई की 55,158 सीटें थीं, जो इस वर्ष घटकर 50,271 हो गई हैं। आरटीई में प्रदेश के 33 जिलों के 6,573 स्कूलों ने पंजीयन कराया है। पिछले वर्ष 6,507 स्कूलों का पंजीयन था। इस वर्ष 66 स्कूलों की बढ़ोत्तरी हुई है।
अधिकारियों ने बताया कि अभी स्कूलों का आंकड़ा बढ़ सकता है, उससे सीटों की संख्या में भी वृद्धि होगी। इससे पहले 2022-23 में प्रदेश में आरटीई की 80 हजार सीटें थी। पिछले वर्ष 25 हजार आरटीई की सीटों में कटौती की गई थी। पिछले वर्ष तीन चरणों की प्रवेश प्रक्रिया के बाद भी आठ हजार से ज्यादा सीटें खाली रह गईं थी।
दोबारा खुलेगा पोर्टल
डीपीआइ की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक स्कूलों के पंजीयन के लिए दोबारा पोर्टल खोला जाएगा। प्रथम चरण की प्रवेश प्रक्रिया पूरी के बाद 15 जून से नए स्कूलों को पंजीयन कराने का मौका दिया जाएगा।
निजी स्कूलों में मिलता है प्रवेश
आरटीई के तहत प्रदेश के निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को प्रवेश मिलता है। बड़े निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहती हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का बड़े व निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का सपना इससे पूरा होता है। नर्सरी अथवा पहली कक्षा में प्रवेश होने के बाद 12वीं तक निश्शुल्क पढ़ाई करते हैं। इस योजना के तहत वर्तमान में निजी स्कूलों में तीन लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।


