Gwalior agriculture information: मौसम के दुष्प्रभाव मानव स्वास्थ्य से लेकर फसलों को भी प्रभावित कर रहा है। जहां लोग बीमार होकर अस्पताल पहुंचे तो वहीं खेत में खड़ी फसलों में इस बार पैदावार कम हो सकती है
By anil tomar
Publish Date: Solar, 10 Mar 2024 08:42 AM (IST)
Up to date Date: Solar, 10 Mar 2024 12:15 PM (IST)
HighLights
- इस बार लंबे समय तक कोहरा छाया और सर्दी पड़ी
- बीच-बीच में तेज आंधी-पानी और ओलावृष्टि से पड़ा असर
Gwalior agriculture information: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मौसम के दुष्प्रभाव मानव स्वास्थ्य से लेकर फसलों को भी प्रभावित कर रहा है। जहां लोग बीमार होकर अस्पताल पहुंचे तो वहीं खेत में खड़ी फसलों में इस बार पैदावार कम हो सकती है, क्योंकि कृषि वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार दलहनी, तिलहनी और उद्यानिकी फसलों में 30 प्रतिशत तक का नुकसान होने की आशंका है, क्योंकि इस बार लंबे समय तक कोहरा और सर्दी पड़ी इसके साथ ही बीच-बीच में तेज आंधी पानी और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हुआ है। यही कारण है सब्जी आदि के दाम कम नहीं हुए और आने वाले समय में दाम बढ़ सकते हैं।
अगेती फसलों को अधिक नुकसान
कृषि वैज्ञानिक राज सिंह कुशवाह का कहना है कि इस बार उन फसलों को नुकसान हुआ है जिन फसलों की बुवाई पहले हो चुकी थी, जिसमें सरसों, गेहूं, मसूर आदि की फसलें प्रमुख हैं। इन फसलों को जनवरी के पूरे माह घने कोहरे और कड़ाके की ठंड का दंश झेलना पड़ा, जिसके कारण इन फसलों में बाल तो लगी, लेकिन कड़ाके की ठंड के कारण वह पक नहीं सकीं, इसलिए दाना ठीक से नहीं बन सका। इस कारण से करीब 30 प्रतिशत अगेती फसलों का उत्पादन कम होने वाला है। यही कारण है कि सब्जी की फसलों पर भी मौसम का बुरा प्रभाव पड़ा है।
अप्रैल में सस्ती हो सकती सब्जी
- कृषि विज्ञानी का कहना है कि सब्जी के दाम अब सस्ते होने वाले नहीं हैं, क्योंकि मौसम के प्रभाव के कारण जो फसलों को नुकसान हुआ है, उसमें सब्जी की फसलें भी शामिल हैं, लेकिन अब जो किसान सब्जी की फसल की बुवाई कर रहे हैं वह अप्रैल के आखिर में बाजार में आ जाएंगी। तभी सब्जी के दाम कम होंगे और आमजन को राहत मिल सकेगी।
- बे-मौसम आई आंधी-पानी और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हुआ है। फरवरी और मार्च माह में जो वर्षा हुई है, उसके कारण गेहूं, चना, मसूर और सरसों की फसल को काफी नुकसान हुआ है, क्योंकि तेज हवा के कारण फसलें जमीन पर बिछ गईं। जो फसलें कटकर खलिहान में पहुंच गई थीं उन्हें और भी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। गेहूं का दाना कमजोर होने के साथ ही उसका भूसा में भी चमक वाला नहीं रहने वाला है।






