Jabalpur Information : जीसीएफ में नौसेना के लिए बनेंगे रिमोट कंट्रोल गन, इसलिए महत्वपूर्ण है
Jabalpur Information : रक्षा मंत्रालय ने किया एडवांस्ड वेपन इक्विपमेंट इंडिया के साथ किया करार।
By Alok Banerjee
Publish Date: Thu, 15 Feb 2024 08:18 AM (IST)
Up to date Date: Thu, 15 Feb 2024 08:18 AM (IST)

HighLights
- एवील की इकाई त्रिची में अब तक होता रहा उत्पादन।
- 41 आयुध निर्माणियों को सात प्रमुख कंपनियों के अधीन बांटा दिया था।
- एवील के पास जीसीएफ सहित देश की 8 निर्माणी अधीन कार्य कर रही हैं।
Jabalpur Information : नई दुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। रक्षा क्षेत्र में देश की 41 आयुध निर्माणियों में अग्रणी तोपगाड़ी निर्माणी (जीसीएफ) नए वित्त वर्ष में भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के अब तक की सबसे आधुनिक बंदूकों में से एक स्टेबेलिस्ड रिमोट कंट्रोल गन (एसआरसीजी) बनाएगी। इसके लिए केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के साथ एडवांस्ड वेपन इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (एवील) ने 1752.13 करोड़ रुपये का एक करार पर साइन किए हैं।
एवील की इकाई है जीसीएफ
महत्वपूर्ण है कि निगमीकरण के बाद सरकार ने देश की सभी 41 आयुध निर्माणियों को सात प्रमुख कंपनियों के अधीन बांटा दिया था। जिसके बाद नगर की सबसे पुरानी निर्माणी जीसीएफ एडवांस्ड वेपन इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (एवील) की एक इकाई के रूप में कार्य कर रही है। एवील के पास जीसीएफ सहित देश की 8 निर्माणी अधीन कार्य कर रहीं हैं।
एसआरसीजी महत्वपूर्ण गन
12.7 मिमी स्टेबेलिस्ड रिमोट कंट्रोल गन (एसआरसीजी) दुश्मन से लड़ाई में महत्वपूर्ण अस्त्र के रूप में लोकप्रिय रही है। यह गन भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल को समुद्री सुरक्षा में मददगार साबित होगी। यह छोटे खतरों के सटीक लक्ष्यीकरण में भी सक्षम हैं। साथ ही इसका उत्पादन आत्मनिर्भर भारत के बढ़ते कदम का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। करीब 463 गन में उपयोग तकनीकी साजो-सामान का 85 प्रतिशत हिस्सा भारत में निर्मित होंगे।
एवील की इकाई त्रिची में अब तक होता रहा उत्पादन
एडवांस्ड वेपन इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (एवील) की एक अन्य इकाई आयुध निर्माणी त्रिची में अब तक एसआरसीजी का उत्पादन होता रहा है। तमिलनाडु की इस फैक्ट्री के साथ जीसीएफ को भी महत्वपूर्ण अस्त्र बनाने का मौका मिलेगा।
एवील को मिले नए उत्पादन को लेकर निर्माणी के कर्मचारियों में हर्ष है, और आगामी वित्त वर्ष में हमें मांग के अनुरूप नए अस्त्र-शस्त्र बनाने का अवसर मिलेगा।
अमित प्रताप सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, जीसीएफ।


