Mumbai: माता-पिता पर ज्यादा समय और पैसा खर्च करना पत्नी को नहीं आया पसंद, घरेलू हिंसा का केस लगाया, कोर्ट ने खारिज की याचिका
महिला महाराष्ट्र सचिवालय में सहायक के रूप में काम करती है। उसने सुरक्षा और मुआवजे की मांग करते हुए घरेलू हिंसा सुरक्षा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज की थी।
By Arvind Dubey
Publish Date: Wed, 14 Feb 2024 02:33 PM (IST)
Up to date Date: Wed, 14 Feb 2024 02:33 PM (IST)

पीटीआई, मुंबई। महिला को इस बात पर आपत्ति थी कि उसका पति अपने माता-पिता की देखभाल करने में ज्यादा समय खर्च करता है, उन पर पैसे भी खर्च करता है। इसी शिकायत के साथ महिला ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि इसे घरेलू हिंसा माना जाए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। जानिए पूरा मामला
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ पहले मजिस्ट्रेट अदालत में याचिका दी थी। यहां मन-मुताबिक फैसला नहीं हुआ तो निचली अदालत के फैसले को सत्र अदालत में चुनौती दी। सत्र अदालत ने भी याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि एक पुरुष द्वारा अपनी मां को समय और पैसा देना घरेलू हिंसा नहीं माना जा सकता है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (दिंडोशी अदालत) आशीष अयाचित ने अपने आदेश में कहा कि सामने वाले पक्ष के खिलाफ आरोप अस्पष्ट और संदिग्ध हैं और यह साबित करने के लिए कोई प्रमाण नहीं है कि उन्होंने महिला पर घरेलू हिंसा की।
राज्य सचिवालय में काम करती है महिला
महिला राज्य सचिवालय में सहायक के रूप में काम करती है। उसने सुरक्षा और मुआवजे की मांग करते हुए घरेलू हिंसा सुरक्षा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज की थी।
उसने आरोप लगाया कि शादी से पहले पति ने अपनी मां की मानसिक बीमारी की बात छिपाकर उसे धोखा दिया।
महिला ने यह भी दावा किया कि सास उसकी नौकरी का विरोध करती थी और उसे परेशान करती है। पति और सास उससे झगड़ते हैं।
महिला ने अपनी याचिका में कहा कि पति सितंबर 1993 से दिसंबर 2004 तक अपनी नौकरी के लिए विदेश में रहे। जब भी छुट्टी पर भारत आते, तो अपनी मां से मिलने जाते थे और उन्हें हर साल 10,000 रुपए भेजते थे। वहीं ससुराल वालों ने सभी आरोपों से इनकार किया।
पति ने कहा कि महिला ने कभी उसे और उसके परिवार को अपना नहीं माना। उसके सभी आरोप झूठे हैं। पति ने उसकी क्रूरताओं के कारण पारिवारिक अदालत में तलाक की याचिका दायर की थी।
पत्नी ने बिना किसी जानकारी के पति के एनआरई खाते से 21.68 लाख रुपये निकाले और इस राशि से एक फ्लैट खरीदा।
फैसले के आखिरी में महिला की याचिका लंबित रहने के दौरान ट्रायल कोर्ट (मजिस्ट्रेट) ने उसे प्रति माह 3,000 रुपये का अंतरिम गुजारा भत्ता दिया।


